श्रीमद्भागवत पुराणके आधार पर कपिल मुनि और उनके आश्रम विन्दुसर के सम्बन्ध में यहाँ कुछ और सूचनाएँ दी जा रही हैं । नीचे दी गयी दोनों स्लाइड्स आपको कपिल मुनि से जोड़ने का काम कर सकती हैं । अगले अंकों में कुछ और बातों पर चर्चा होगी। आगे चल कर हम 72 सांख्य कारिकाओं पर भी चर्चा प्रारम्भ करेंगे।
Sunday, March 21, 2021
Saturday, March 20, 2021
कपिल और सांख्य दर्शन
आज से कपिल मुनि और उनके सांख्य दर्शन के सम्बन्ध में आपको लगभग प्रतिदिन कुछ न कुछ सूचनाएं मिलती रहेगी । हम हिन्दू हैं , हमारा धर्म सनातन धर्म है लेकिन हम अपनें इस सनातन धर्म के सम्बन्ध में जानते क्या है ? अकेले में परमात्मा को साक्षिणमां कर इस बिषय पर सोचना जरूर । केवल कहने मात्र से क्या होगा , जनाब कुछ अपनें को , कुछ अपनें सनातन धर्म को भी तो जानने की कोशिश कीजिए ! इस शृंखला के अंतर्गत पहले हम अपने प्राचीनतम दर्शन -सांख्य दर्शन में झांकने की कोशिश में
महा मुनि कपिल जी को समझते हैं जो सांख्य के आदि गुरु हैं।
Thursday, March 18, 2021
प्रकृति - पुरुष क्या हैं ?
सांख्य दर्शन और श्रीमद्भगवद्गीत में प्रकृति - पुरुष सम्बंधित कारिकाओं और श्लोकों से परिचय करें।
यहाँ गीता वेदांत आधारित है और कारिकाएँ कपिल मुनि के सांख्य दर्शन से हैं ।
वेदांत ईश्वर केंद्रित है और सांख्य में ईश्वर शब्द नहीं है।
अद्वैत्य और द्वैत्य में प्रकृति - पुरुष रहस्य से परिचित होइए । मदद के लिए निम्न स्लाइड को देखें 👇
Wednesday, March 17, 2021
महर्षि पतंजलि का चौथे प्रकार का प्राणायाम
महर्षि यहाँ पूरक , रेचक और कुम्भक से परे की स्थिति को चौथे प्रकार का प्राणायाम कह रहे हैं । आखिर यह प्राणायाम है , क्या ?
चौथे प्रकार के प्राणायाम के सम्बन्ध में गीता : 4.29 - 4.30 श्लोकों को भी साथ - साथ समझें ।
Monday, March 15, 2021
प्राणायाम क्या है ?
प्राणायाम पतंजलि योगसूत्र में अष्टांगयोग का चौथा अंग है । आज से प्राणायाम की चर्चा प्रारम्भ हो रही है।
पतंजलि योग में प्राणायाम का अपना महत्त्व है । प्राणायाम श्वास के प्रति होश बनाने का प्रयोगात्मक विज्ञान है ।
आज इस अंक में हम श्वास सम्बंधित कुछ बुनियादी बातों को देखते हैं 👇
Sunday, March 14, 2021
योग दर्शन में आसन की परिभाषा क्या है ?
महर्षि पतंजलि अपनें योगसूत्र के साधन पाद के सूत्र : 46 - 48 में आसन के संबंधनमें निम्न बातें बताते हैं 👇
1- योग में देह को जिस स्थिति में स्थिर सुख मिले , उसे आसन कहते हैं ।
2 - आसन - सिद्धि मिलनें पर सहज यत्न से चित्त परम् पर स्थिर हो जाता है और वह योगी निर्द्वन्द्व हो जाता है ।
👉इन बातों के सम्बन्ध में देखिये निम्न स्लाइड को 👇
अपने विचार
● सच्चाई से नहीं डरता , लेकिन सच्चाई न समझनेवालों से डरता हूँ ।
● प्रभु से सभीं माफ़ी माँगते हैं लेकिन स्वयं माफ़ नहीं करना चाहते !
● हाँथ की लकीरों में लिखा है जबतक जहाँ रहना , तबतक वहाँ रहना ही पड़ता है ।
● जिंदगी सबकुछ सिखा और समझ देती है लेकिन सिखता - समझता कौन है !
// ॐ //
Thursday, February 18, 2021
पतंजलि योग दर्शन में यम - नियम साधना में व्रत - महाव्रत क्या हैं ?
योग क्या है ? श्रंखला में यह 25 वां अंक है जिसमें पतंजलि योग दर्शन आधारित अष्टांगयोग के प्रथम दी अंग - यम - और नियम साधना के अन्यर्गत व्रत - महाव्रत को यहाँ निम्न स्लाइड के माध्यम से समझते हैं।
Sunday, February 14, 2021
ज्ञानयोग के सम्बन्ध में गीता
देखते हैं ज्ञान -ज्ञानी के सम्बन्ध में गीता के कुछ सांख्ययोग जैसे सूत्रव के सार को जिसमें प्रकृति - पुरुष बोध को ज्ञान बताया गया है ।


















































