हम हैं तो सनातनी लेकिन कभी सोचा कि हम वेद को कितना जानते हैं? और यदि नहीं जानते तो इनकी साधना कैसे करेंगे!
वेद की प्रमुख संहिता को ही वह वेद कहते हैं , अलग से कोई वेद ग्रन्थ नहीं होता जैसे ऋग्वेद की एक शाकल संहिता है जिसे ऋग्वेद कहते हैं , अलग से कोई ऋग्वेद ग्रन्थ नहीं है। । संहिताएं मूल मंत्रों के संग्रह को कहते हैं। संहिता शब्द संग्रह शब्द से बना हुआ है।वेदों की प्रमुख संहिताओं को निम्न टेबल में देखें जिनसे वे वेद जाने जाते हैं ⤵️
चार वेद हैं और हर वेद के चार - चार अंग हैं , जैसा ऊपर स्लाइड में दिखाया गया है। हर वेद अंग के अपने - अपने विषय हैं जिन्हें ऊपर संक्षेप में देख सकते हैं। वेदांग वेद साधना के चरण हैं जिनका क्रम निम्न प्रकार है >>>
1.संहिता ( मूल मंत्रों का संग्रह ) : मूल मंत्रों के सही उच्चारण की साधना , संबंधित वेद साधना का पहला चरण है। संहिता के मंत्रों के उच्चारण की सिद्धि मिलने पर ..
2. ब्राह्मण (वैदिक कर्म और यज्ञ की विधियाँ) ग्रंथों की साधना प्रारंभ होती हैं। जब यह दूसरा चरण सिद्ध होता है तब ..
3.तीसरे चरण आरण्यक (स्वाध्याय) की साधना प्रारंभ होती हैं। आरण्यक साधना सिद्धि मिलते ही
4. चौथे चरण उपनिषद (तत्त्व ज्ञान से कैवल्य मुखी) साधना में प्रवेश मिल जाता है । उपनिषद् की साधना सिद्धि पर कैवल्य मिलता है। कैवल्य अर्थात पुरुषार्थ का शून्य हो जाना और त्रिगुणों का प्रतिप्रसव हो जाना ।
~~ ॐ ~~