Friday, May 8, 2026

वेद मीमांसा

हम हैं तो सनातनी लेकिन कभी सोचा कि हम वेद को कितना जानते हैं? और यदि नहीं जानते तो इनकी साधना कैसे करेंगे!

वेद ⤵️

संहिता

ब्राह्मण

आरण्यक 

उपनिषद् 

ऋग्वेद

01

02

02

10

यजुर्वेद

06

04

02

51

सामवेद

03

04

01

16

अथर्ववेद

02

01

00

31

योग >

12

11

05

108

वेद की प्रमुख संहिता को ही वह वेद कहते हैं , अलग से कोई वेद ग्रन्थ नहीं होता जैसे ऋग्वेद की एक शाकल संहिता है जिसे ऋग्वेद कहते हैं , अलग से कोई ऋग्वेद ग्रन्थ नहीं है। । संहिताएं मूल मंत्रों के संग्रह को कहते हैं। संहिता शब्द संग्रह शब्द से बना हुआ है।वेदों की प्रमुख संहिताओं को निम्न टेबल में देखें जिनसे वे वेद जाने जाते हैं ⤵️


वेद

संहिता

मंत्र सं.

प्रमुख मंत्र

ऋग्वेद 

शाकल 

लगभग 10,552 

*1.1.1 

अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् । होतारं रत्नधातमम् ॥

शुक्ल

यजुर्वेद

माध्यंदिन वाजसनेयी संहिता

1975

1.1

ॐ इषे त्वोर्जे त्वा वायव स्थ देवो वः सविता प्रार्पयतु श्रेष्ठतमाय कर्मणे

कृष्ण

यजुर्वेद

तैत्तिरीय

4,593 से 4,649

1.1

ॐ इषे त्वोर्जे त्वा वायव स्थ देवो वः सविता प्रार्पयतु श्रेष्ठतमाय कर्मणे ।

सामवेद

कौथुम

1,875

इनमें 1771

ऋग्वेद की हैं

1.1

अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये ।

अथर्ववेद 

शौनकीय

5977

1.1.1

ये त्रिषप्ताः परियन्ति विश्वा रूपाणि बिभ्रतः ।वाचस्पतिर्बला तेषां तन्वो अद्य दधातु मे ॥

चार वेद हैं और हर वेद के चार - चार अंग हैं , जैसा ऊपर स्लाइड में दिखाया गया है। हर वेद अंग के अपने - अपने विषय हैं जिन्हें ऊपर संक्षेप में देख सकते हैं। वेदांग वेद साधना के चरण हैं जिनका क्रम निम्न प्रकार है >>>

1.संहिता ( मूल मंत्रों का संग्रह ) : मूल मंत्रों के सही उच्चारण की साधना , संबंधित वेद साधना का पहला चरण है। संहिता के मंत्रों के उच्चारण की सिद्धि मिलने पर ..

2. ब्राह्मण (वैदिक कर्म और यज्ञ की विधियाँ) ग्रंथों की साधना प्रारंभ होती हैं। जब यह दूसरा चरण सिद्ध होता है तब  ..

3.तीसरे चरण आरण्यक (स्वाध्याय) की साधना प्रारंभ होती हैं। आरण्यक साधना सिद्धि मिलते ही 

4. चौथे चरण उपनिषद (तत्त्व ज्ञान से कैवल्य मुखी) साधना में प्रवेश मिल जाता है । उपनिषद् की साधना सिद्धि पर कैवल्य मिलता है। कैवल्य अर्थात पुरुषार्थ का शून्य हो जाना और त्रिगुणों का प्रतिप्रसव हो जाना । 

~~ ॐ ~~

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