Thursday, May 27, 2021
Wednesday, May 26, 2021
अष्टावक्र गीता श्लोक - 1.1 भाग - 3
अष्टावक्र गीता में अध्याय - 1 श्लोक -1 वक्ता विदेह राजा जनक , संपूर्ण गीता का प्राण है अतः इस श्लोक की थीक - ठीक समझ , संपूर्ण गीता की समझ है ।
आज हम इस श्लोक के तीसरे भाग से परिचित हो रहे हैं । अगला अंक में अष्टावक्र गीता अध्याय - 1 श्लोक : 2 - 20 तक का सार दिया जाएगा जिसके वक्ता अष्टावक्र जी हैं ।
अगले 19 अष्टावक्र के श्लोकों को सुनते ही विदेह राजा जनक रूपांतरित ही जाते हैं । रूपांतरित का भाव है कि वे स्थिर प्रज्ञ गुणातीत हो उठते हैं क्योंकि अष्टावक्र गीता में अगले 19 अध्यायों में अष्टावक्र और विदेह राजा जनक के वचन पूर्णतया एक जैसे हैं और दोनों यह बताते हैं - मैं कौन हूँ ?
अब अष्टावक्र गीता श्लोक : 1 , भाग - 3 को देखते हैं ⬇️
Tuesday, May 25, 2021
अष्टावक्र गीता श्लोक - 1 भाग - 2 वैराग्य क्या है ?
अष्टावक्र गीता श्लोक - 1 , राजा जनक का श्लोक अष्टावक्र गीता का केंद्र है । ज्ञान , वैराग्य और मोक्ष को राजा जनक बुद्धि स्तर पर समझना चाह रहे हैं । श्रीमद्भगवद्गीत अध्याय : 13 श्लोक - 2 में प्रभु श्री कृष्ण कह रहे हैं , " क्षेत्रक्षेत्रज्ञो : ज्ञानं यत् ज्ञानं " अर्थात क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का बोध ही ज्ञान है । आगे प्रभु श्री कहते हैं , यह देह क्षेत्र है और इसमें रहने वाला , क्षेत्रज्ञ है । रहनेवाला कौन है ? रहनेवाला आत्मा है ।
जीव , प्रकृति ( माया ) और पुरुष ( आत्मा ) का योग है । प्रकृति जड़ है और आत्मा शुद्ध चेतन । जीव का शरीर , आत्मा को छोड़ शेष सब माया ( प्रकृति ) है । सांख्य और पतंजलि भी कहते हैं , 25 तत्त्वों का बोध ज्ञान है । 25 तत्त्वों में 24 तत्त्व प्रकृति और उसकी विकृति हैं और 25 वां तत्त्व पुरुष है जिसे वेदांत में आत्मा कहते हैं । प्रकृति तीन गुणों की साम्यावस्था का नाम है जो पुरुष की ऊर्जा से विकृत हो जाती है और 23 संर्गों की उत्पत्ति होती है । यही सर्ग स्थूल देह का निर्माण करते हैं और इस जड़ देह में पुरुष ( चेतन ) सभीं संर्गों में प्राण संचालित करता है ।
अब देखते हैं स्लाइड को ⬇️
Monday, May 24, 2021
Sunday, May 23, 2021
अष्टावक्र गीता का शुभारंभ
अभीं तक हम अष्टावक्र गीता से सम्बंधित पात्रों एवं घटनाओं के सम्बन्ध में चर्चा कर रहे थे । अब आज से मूल अष्टावक्र गीता में प्रवेश कर रहे हैं । अष्टावक्र गीता के प्रवेश द्वार पर 293 श्लोकों की एक तालिका दिखती है जो स्वयं में ध्यान का एक प्रमुख आलंबन है । कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनको व्यक्त करने पर वे अपना अस्तित्व खो देती हैं । अतः हम आप से अनुरोध करते हैं कि की आप स्वतः अष्टावक्र गीता के श्लोक - तालिका को देखें और अपनें बुद्धि - योग का इसे माध्यम बनायें , बहुत सकून मिलेगा , आप को । आइये ! देखते हैं इस तालिका को⬇️
Saturday, May 22, 2021
बंदी - अष्टावक्र शास्त्रार्थ का अंतिम भाग
आचार्य बंदी - अष्टावक्र शास्त्रार्थका आज अंतिम अंक आप के लिए प्रस्तुत है।
अगला हम सबका पहला कदम अष्टावक्र गीता में होने वाला है जहाँ अष्टावक्र के 226 श्लोकों एवं जनक के 67 श्लोकों से परिचय होगा।
राजा जनक अपनें 67 श्लोकों में से श्लोक : 1 के माध्यम से एक मात्र प्रश्न करते हैं और यही एक प्रश्न एक मात्र यह बताता है कि जनक शिष्य बनने के जिज्ञासु हैं । इस पहले श्लोक के बाद के श्लोकों में अष्टावक्र - जनक की भाषा ,भाव और शैली सामानांतर दिखती हैं ; दोनों एक की ही पुनरावृत्ति करते हैं ।
~~शेष अगले अंकों में ~~
Friday, May 21, 2021
Wednesday, May 19, 2021
Tuesday, May 18, 2021
आचार्य बंदी - अष्टावक्र शास्त्रार्थ का अगला भाग
आचार्य बंदी वरुण देव के पुत्र हैं । विशेष कारण से अपना परिचय दिए बिना विदेह राजा जनक के दरबार में प्रधान आचार्य के रूप में आसीन हैं ।
एक 12 वर्षीय ऋषि पुत्र से शास्त्रार्थ कर रहे हैं । शात्रार्थ का यह तीसरा दिन चल रहा है । अभी कुछ दिनों में इस शास्त्रार्थ की समाप्ति होने वाली है । इस जे बाद अष्टावक्र गीता का मूल रूप प्रस्तुत किया जायेगा । यदि आप चाहें तो हमारे साथ इस यात्रा और यथावत बने रहें ।
Monday, May 17, 2021
Sunday, May 16, 2021
आचार्य बंदी - अष्टावक्र शास्त्रार्थ भाग 2.1
विदेह राजा जनक के प्रधान आचाए बंदी और ऋषि पुत्र अष्टावक्र में शास्त्रार्थके पहले भाग में पौराणिक बातों की चर्चा हो रही थी । अब भाग दो में शास्त्रार्थ का बिषय वेदांत है और बेदान्त में ' मैं कौन हूँ ' बिषय केंद्रित चर्चा को यहाँ दिया जा रहा है .⬇️
Saturday, May 15, 2021
आचार्य बंदी - अष्टावक्र शास्त्रार्थ भाग - 1 के अंतिम दो अंक
अभी तक आचार्य बंदी और ऋषि पुत्र अष्टावक्र के मध्य पौराणिक विषयों पर शास्त्रार्थ चल रहा था । अब इन दो अंको के बाद वैदिक विषयों पर जो शास्त्रार्थ हुआ , उसे प्रारम्भ किया जायेगा ।
#हम अभीं तक अष्टावक्र गीता सन्दर्भ में पात्रों से परिचय कराये हैं , गीता के सम्वन्ध में कुछ बातें बताये हैं और आचार्य बंदी - अष्टावक्र शास्तार्थ के पहले भाग को दिखाया है ।
अब आगे के अंको का सम्बन्ध आचार्य बंदी और अष्टावक्र के उस शास्त्रार्थ को दिखाया जाएगा जिसका सम्बन्ध ब्रह्म - माया से है ।
इस चर्चा के बाद अष्टावक्र गीता के 20 अध्यायों के सार को दिखाया जाएगा ।
Thursday, May 13, 2021
Wednesday, May 12, 2021
अष्टावक्र - आचार्य बंदी शास्त्रार्थ भाग - 4
पहले बताया जा चुका है कि अष्टावक्र और आचार्य बंदी का शास्त्रार्थ दो रूपों में दिया गया है ; पहले रूप में पौराणिक संख्या आधारित बिषयों पर चर्चा है जिसे यहाँ दिखाया जा रहा है और दूसरी चर्चा वेदांत आधारित है जिसे इस चर्चा के पूरा होने के बाद प्रारम्भ की जायेगी ।
आइये ! अभीं चलते हैं शास्त्रार्थ की चौथी कड़ी को स्पर्श करने⬇️
Tuesday, May 11, 2021
Monday, May 10, 2021
Sunday, May 9, 2021
Saturday, May 8, 2021
विदेह राजा जनक का अष्टावक्र से दूसरा प्रश्न पूछते हैं
राजा जनक अष्टावक्र से दो प्रश्न करते हैं । पहला प्रश्न आप सब देख चुके हो , पिछले अंक में और अब दूसरे प्रश्न और उसके अष्टावक्र के उत्तर को देखिये ।
अगले अंक से आचार्य बंदी और अष्टावक्र का शास्त्रार्थ आप सबको देखने को मिलेगा ।र
Friday, May 7, 2021
राजा जनक का पहला प्रश्न और अष्टावक्र का उत्तर
अष्टावक्र और राजा जनक का पहला संबाद ।
विदेह राजा जनक अष्टावक्र की बुद्धि परखने हेतु दो प्रश्न करते हैं , जिनमें से पहला प्रश्न और उसका उत्तर यहाँ दिया जा रहा है। अगले अंक में दूसरा प्रश्न और अष्टावक्र के उत्तर को आप देख सकेंगे ।
Thursday, May 6, 2021
Sunday, May 2, 2021
अष्टावक्र की जनकपुर की यात्रा
हम अष्टावक्र गीता की यात्रा और निकले हुए हैं और समय -समय पर जो -जो मोड़ आते हैं , वहाँ - वहाँ घडी - दो घडी रुकना ही पड़ता है क्योंकि अगर न रुकें तो अष्टावक्र गीता के पात्रों के प्रति श्रद्धायुक्त व्यवहार न होगा ।
आज हम देख रहे हैं कि अंततः युवा अष्टावक्र मिथिला नरेश विदेह राजा जनक के दरबार में पहुँच चुके हैं ।
आगे क्या होता है , अगले आने वाले अंकों में देखने को मिलेगा ।
ध्यान रखें कि 20 अध्ययब 293 श्लोकों वाले अष्टावक्र गीता का केंद्र आत्मा है और श्रीमद्भगवद्गीता में आत्मा से सम्बंधित 26 श्लोक हैं ।
।। ॐ ।।
Wednesday, April 28, 2021
अष्टावक्र गीता क्रमशः
अभी हम अष्टावक्र गीता के पात्रों से परिचित हो रहे हैं । जब परिचय पूरा होगा तब हम अष्टावक्र गीता की यात्रा प्रारंभ करेंगे। आज परिचय के अंतर्गत एक और प्रसंग 📚⬇️
Tuesday, April 27, 2021
ऋषि अष्टावक्र भाग - 2
★ऋषि अष्टावक्र से सम्बंधित एक कथा ⬇️
अगले अंक में अष्टावक्र गीता -पात्र परिचय में कुछ और बातें , आप के लिए दी जाएंगी ।// ॐ //
Friday, April 23, 2021
अष्टावक्र गीता : पात्र परिचय :अष्टावक्र से मिलिए
अष्टावक्र गीता प्रारम्भ करने से पहले इसके पात्रों से परिचय होना आवश्यक है अतः राजा जनक , मित्र -वरुण के बाद आज हम ऋषी अष्टावक्र से मिल रहे हैं।
अष्टावक्र का संक्षिप्त परिचय दो भागों में देखी जा सकती है । आज पहले भागको देख रहे हैं 👇
Tuesday, April 20, 2021
Monday, April 19, 2021
मित्र वरुण देवता कौन हैं ?
अष्टावक्र गीता प्रारम्भ करने से पहले हम अष्टावक्र गीता के पात्रों से परिचय कर रहे हैं जिससे आगे चल कर कोई संदेह न हो सके । पहले विदेह राजा जनक से परिचय हुआ और अब जल के देवता मित्र वरुण से मिलते हैं ⬇️
// ॐ //Sunday, April 18, 2021
अष्टावक्र गीता के राजा जनक कौन थे ?
अष्टावक्र वक्र गीता भाग - 2 के अंतर्गत पहले पात्रों से परिचय करते हैं । आज राजा जनक के सम्बन्ध में कुछ बातें श्रीमद्भागवत पुराण के आधार पर देखते हैं ।
Friday, April 16, 2021
अष्टावक्र गीता परिचय
आज से अष्टावक्र गीता प्रारम्भ हो रहा है । परिचय के रूप में आप के लिए यह स्लाइड दी गयी है ।
अगले अंकों में अष्टावक्र गीता की आगे की यात्रा पर होंगे ।। ॐ ।।
Wednesday, April 14, 2021
Tuesday, April 13, 2021
Sunday, April 11, 2021
Saturday, April 10, 2021
बिखरे मोती
समय भाग्य रेखा के संग - संग चलता है । जीवन के संगीत को यदि सुनना हो तो जिंदगी की यात्रा में जब भी कोई ठोकर लगे तो घबड़ाना नहीं , वही रुक जाना और अपनी गलतियों के सम्बन्ध में सोचने के लिए हिम्मत जुटाना वैसे यह है , बहुत कठिन पर इसके अलावा और उपाय भी तो नहीं । कौन देख रहा है , आपको ? किससे डर रहे हैं , आप ? यदि अपनी गलतियों को आप स्वयं नहीं देख सकते तो और कौन देखेगा ?
समय गुरुओं का भी गुरु है , पर्त दर पर्त गलतियों को दिखाता रहता है लेकिन एक हम हैं जो आँख खोलना ही नहीं चाहते , ऐसी परिस्थिति में हम अपने जीवन यात्रा में बार -बार ठोकरे खाते रहते हैं और चलते रहते हैं ।
इस यात्रामें जीवन का सूरज कब , कहाँ और कैसे डूब जाता है , आहट भी नहीं मिल पाती ।
जीवन यात्रा में कितनी यात्रा हुयी , कितनी बाकी है , इस मुद्दे पर कभीं न सोचना लेकिन इस बात पर हर पल सोचते रहना कि यात्रा होश पूर्ण कर रहे हो या बेहोशी में कर रहे हो !
Wednesday, April 7, 2021
Wednesday, March 31, 2021
सांख्य कारिका - 3 का शेष भाग
पिछले अंक में सांख्य कारिका - 3 के आधार पर 25 तत्त्वों को दिखता गया और अब तन्मात्र , महाभूत , 05 ज्ञान इंद्रियों एवं 05 कर्म इंद्रियों के सम्बन्ध को देखते हैं 👇
Sunday, March 28, 2021
कपिल मुनि सांख्यदर्शन में मूल प्रकृति
यहाँ यह दिखाया जा रहा है कि जड़ प्रकृति के ऊपर जब चेतन पुरुष का प्रकाश पड़ता है तब वह सक्रिय हो उठती है और उसके विकृत होनें से पहले सर्ग महत् ( बृद्धि ) की उत्पत्ति कैसे होती है ? और यहाँ से कारण - कार्य सांख्य सिद्धान्त का श्रीगणेश कैसे होता है ?
सृष्टि विकास की पूरी गणित सांख्य दर्शन देता है जिस सिद्धान्त को वैज्ञानिक ढूढ रहे हैं ।
आइये ! हम सब अब सावधानी के साथ उतरते हैं , इस गणित में 👇
Saturday, March 27, 2021
सांख्य कारिका - 3 भाग - 1
ईश्वरकृष्ण रचित सांख्य कारिकाओं की श्रंखला में आज हम तीसरी कारिका के भाग - 1 को देख रहे हैं।
तीन गुणों के साम्यावस्था का माध्यम , मूल प्रकृति है । इस अवस्था में यह निष्क्रिय होती है लेकिन इसे ज्योंकी पुरुष का प्रकाश मिलता है , यह सक्रिय हो उठती है और संर्गों की उत्पत्ति होती है । संर्गों से विसर्गों की उत्पत्ति ब्रह्मा द्वारा रचित है ।
देखिये निम्न स्लाइड को 👇
Friday, March 26, 2021
सांख्य कारिका - 2
आज हम सांख्य कारिका - 2 को देख रहे हैं ।यहाँ तीन प्रकार के दुःखों को निर्मूल करने का उपाय बताया जा रहा है । दुःखों को दूर करने और निर्मूल करने को ठीक से समझना चाहिए । दुःखों को दूर करने के बाद भी दुःख लौट आते हैं क्योंकि उनके बीज हमारे अंदर रहते हैं। निर्मूल में दुःखों के बीज भी नष्ट हो जाते हैं अतः दुःखों की पुनरावृत्ति नहीं हो पाती । सांख्य दर्शन तीन प्रकार के दुःखों को निर्मूल करने का उपाय तत्त्व - ज्ञान बोध को बता रहा है , देखिये यहाँ👇
Thursday, March 25, 2021
सांख्य में तीन प्रकार के दुःख
पिछले अंक में ईश्वर कृष्ण रचित सांख्य कारिका : 1भाग - 1 में कारिका के भाव को समझा गया और अब भाग - 2 के अंतर्गत 03 प्रकार के दुःखों को समझते हैं ।
भारतीय दर्शन दुःख निवृत्ति और आवागमन से मुक्ति पाने के आधार पर विकसित हुए हैं ।
सांख्य - पतंजलि बहुत सुंदर योग की गणित देते हैं । यदि आप कौन सुनता है के साथ बने रहे तो आप ....
विषय से वैराग्य , वैराग्य में क्रमशः सम्प्रज्ञात समाधि , असम्प्रज्ञात समाधि , लिङ्ग लय , प्रकृति लय , कैवल्य और अंततः मोक्ष तक की मानसिक यात्रा को ठीक - ठीक समझ सकते हैं ।
चलिये , लौटते हैं 03 प्रकार के दुःखों पर 👇
Wednesday, March 24, 2021
सांख्य कारिका - 1 भाग - 1
कपिल मुनिके सांख्य दर्शन में ईश्वर कृष्ण द्वारा लिखी गयी 72 सांख्य कारिकाओं से हम मिल रहे हैं ।
इस यात्राके आज पहले दिन पहली कारिका से मिल रहे हैं । इस कारिका को दो भागों में दिया जा रहा है , आशा है , आप हमारे साथ बने रहेंगे ।
भारतीय दर्शन दुःख केंद्रित हैं और सांख्य दुःखों से मुक्त होने की दवा रूप में तत्त्व ज्ञान देता है ।
प्रस्तुत है , कारिका - 01 भाग - 1 👇
Tuesday, March 23, 2021
कपिल मुनि का प्रकृति - पुरुष आधारित सांख्य दर्शन
कपिक सांख्य दर्शन परिचय का यह आखिरी अंक है। अगले अंक से ईश्वर कृष्ण रचित 72 कारिकाओं को हिंदी भाषान्तर के साथ प्रस्तुत किया जायेगा।
यह अंक पिछले अंको का सार मात्र है जिससे सांख्य दर्शन की कारिकाओं को समझने में कठिनाई न हो।
कपिल का प्रकृति - पुरुष केंद्रित द्वैतयबाद वेदांत के अद्वैतयबाद से भिन्न है।सांख्य दर्शन गणित जैसा है ।
Monday, March 22, 2021
कपिल सांख्य दर्शन भाग : 4 - 5
अभीं तक हम महामुनि के समय , जीवन और उनके आश्रम के सम्बन्ध में देखते रहे और अब अगली दो स्लाइड्स में चौथे एवं पांचवें भाग के अंतर्गत सांख्य कारिकाओं के सम्बन्ध में तथा सांख्य दर्शन के केंद्र विंदु को देखने जा रहे हैं जो निम्न प्रकार से हैं 👇
Sunday, March 21, 2021
कपिल मुनि और उनका आश्रम
श्रीमद्भागवत पुराणके आधार पर कपिल मुनि और उनके आश्रम विन्दुसर के सम्बन्ध में यहाँ कुछ और सूचनाएँ दी जा रही हैं । नीचे दी गयी दोनों स्लाइड्स आपको कपिल मुनि से जोड़ने का काम कर सकती हैं । अगले अंकों में कुछ और बातों पर चर्चा होगी। आगे चल कर हम 72 सांख्य कारिकाओं पर भी चर्चा प्रारम्भ करेंगे।
Saturday, March 20, 2021
कपिल और सांख्य दर्शन
आज से कपिल मुनि और उनके सांख्य दर्शन के सम्बन्ध में आपको लगभग प्रतिदिन कुछ न कुछ सूचनाएं मिलती रहेगी । हम हिन्दू हैं , हमारा धर्म सनातन धर्म है लेकिन हम अपनें इस सनातन धर्म के सम्बन्ध में जानते क्या है ? अकेले में परमात्मा को साक्षिणमां कर इस बिषय पर सोचना जरूर । केवल कहने मात्र से क्या होगा , जनाब कुछ अपनें को , कुछ अपनें सनातन धर्म को भी तो जानने की कोशिश कीजिए ! इस शृंखला के अंतर्गत पहले हम अपने प्राचीनतम दर्शन -सांख्य दर्शन में झांकने की कोशिश में
महा मुनि कपिल जी को समझते हैं जो सांख्य के आदि गुरु हैं।
Thursday, March 18, 2021
प्रकृति - पुरुष क्या हैं ?
सांख्य दर्शन और श्रीमद्भगवद्गीत में प्रकृति - पुरुष सम्बंधित कारिकाओं और श्लोकों से परिचय करें।
यहाँ गीता वेदांत आधारित है और कारिकाएँ कपिल मुनि के सांख्य दर्शन से हैं ।
वेदांत ईश्वर केंद्रित है और सांख्य में ईश्वर शब्द नहीं है।
अद्वैत्य और द्वैत्य में प्रकृति - पुरुष रहस्य से परिचित होइए । मदद के लिए निम्न स्लाइड को देखें 👇
Wednesday, March 17, 2021
महर्षि पतंजलि का चौथे प्रकार का प्राणायाम
महर्षि यहाँ पूरक , रेचक और कुम्भक से परे की स्थिति को चौथे प्रकार का प्राणायाम कह रहे हैं । आखिर यह प्राणायाम है , क्या ?
चौथे प्रकार के प्राणायाम के सम्बन्ध में गीता : 4.29 - 4.30 श्लोकों को भी साथ - साथ समझें ।
Monday, March 15, 2021
प्राणायाम क्या है ?
प्राणायाम पतंजलि योगसूत्र में अष्टांगयोग का चौथा अंग है । आज से प्राणायाम की चर्चा प्रारम्भ हो रही है।
पतंजलि योग में प्राणायाम का अपना महत्त्व है । प्राणायाम श्वास के प्रति होश बनाने का प्रयोगात्मक विज्ञान है ।
आज इस अंक में हम श्वास सम्बंधित कुछ बुनियादी बातों को देखते हैं 👇
Sunday, March 14, 2021
योग दर्शन में आसन की परिभाषा क्या है ?
महर्षि पतंजलि अपनें योगसूत्र के साधन पाद के सूत्र : 46 - 48 में आसन के संबंधनमें निम्न बातें बताते हैं 👇
1- योग में देह को जिस स्थिति में स्थिर सुख मिले , उसे आसन कहते हैं ।
2 - आसन - सिद्धि मिलनें पर सहज यत्न से चित्त परम् पर स्थिर हो जाता है और वह योगी निर्द्वन्द्व हो जाता है ।
👉इन बातों के सम्बन्ध में देखिये निम्न स्लाइड को 👇
अपने विचार
● सच्चाई से नहीं डरता , लेकिन सच्चाई न समझनेवालों से डरता हूँ ।
● प्रभु से सभीं माफ़ी माँगते हैं लेकिन स्वयं माफ़ नहीं करना चाहते !
● हाँथ की लकीरों में लिखा है जबतक जहाँ रहना , तबतक वहाँ रहना ही पड़ता है ।
● जिंदगी सबकुछ सिखा और समझ देती है लेकिन सिखता - समझता कौन है !
// ॐ //

















































