Sunday, May 2, 2021

अष्टावक्र की जनकपुर की यात्रा

 हम अष्टावक्र गीता की यात्रा और निकले हुए हैं और समय -समय पर जो -जो मोड़ आते हैं , वहाँ - वहाँ घडी - दो घडी रुकना ही पड़ता है क्योंकि अगर न रुकें तो अष्टावक्र गीता के पात्रों के प्रति  श्रद्धायुक्त व्यवहार न होगा  ।

आज हम देख रहे हैं कि अंततः युवा अष्टावक्र  मिथिला नरेश विदेह राजा जनक के दरबार में पहुँच चुके हैं । 

आगे क्या होता है , अगले आने वाले अंकों में देखने को मिलेगा ।

ध्यान रखें कि 20 अध्ययब 293  श्लोकों वाले अष्टावक्र गीता का केंद्र आत्मा है और श्रीमद्भगवद्गीता में आत्मा से सम्बंधित 26 श्लोक हैं ।

।। ॐ ।।

Wednesday, April 28, 2021

अष्टावक्र गीता क्रमशः

 अभी हम अष्टावक्र गीता के पात्रों से परिचित हो रहे हैं । जब परिचय पूरा होगा तब हम अष्टावक्र गीता की यात्रा प्रारंभ करेंगे। आज परिचय के अंतर्गत एक और प्रसंग 📚⬇️


Tuesday, April 27, 2021

ऋषि अष्टावक्र भाग - 2

 ★ऋषि अष्टावक्र से सम्बंधित एक कथा ⬇️

अगले अंक में अष्टावक्र गीता -पात्र परिचय में कुछ और बातें , आप के लिए दी जाएंगी ।

// ॐ //

Friday, April 23, 2021

अष्टावक्र गीता : पात्र परिचय :अष्टावक्र से मिलिए

 अष्टावक्र गीता प्रारम्भ करने से पहले इसके पात्रों से परिचय होना आवश्यक है अतः राजा जनक , मित्र -वरुण के बाद आज हम ऋषी अष्टावक्र से मिल रहे हैं।

अष्टावक्र का संक्षिप्त परिचय दो भागों में देखी जा सकती है । आज पहले भागको देख रहे हैं 👇

Monday, April 19, 2021

मित्र वरुण देवता कौन हैं ?

 अष्टावक्र गीता प्रारम्भ करने से पहले हम अष्टावक्र गीता के पात्रों से परिचय कर रहे हैं जिससे आगे चल कर कोई संदेह न हो सके । पहले विदेह राजा जनक से परिचय हुआ और अब जल के देवता मित्र वरुण से मिलते हैं ⬇️

// ॐ //

Sunday, April 18, 2021

अष्टावक्र गीता के राजा जनक कौन थे ?

 अष्टावक्र वक्र गीता भाग - 2 के अंतर्गत पहले पात्रों से परिचय करते हैं । आज राजा जनक के सम्बन्ध में कुछ बातें श्रीमद्भागवत पुराण के आधार पर देखते हैं ।


Friday, April 16, 2021

अष्टावक्र गीता परिचय

 

आज से अष्टावक्र गीता प्रारम्भ हो रहा है । परिचय के रूप में आप के लिए यह स्लाइड दी गयी है ।

अगले अंकों में अष्टावक्र गीता की आगे की यात्रा पर होंगे ।। ॐ ।।

Sunday, April 11, 2021

बुद्धि स्तर पर योग क्या है ?

 इस स्लाइड में परमहंस योगानंद जी की फोटो लगायी गयी है।

Saturday, April 10, 2021

बिखरे मोती

 

समय भाग्य रेखा के संग - संग चलता है । जीवन के संगीत को यदि सुनना हो तो जिंदगी की यात्रा में जब भी कोई ठोकर लगे तो घबड़ाना नहीं , वही रुक जाना और अपनी गलतियों के सम्बन्ध में सोचने के लिए हिम्मत जुटाना वैसे यह है , बहुत कठिन पर इसके अलावा और उपाय भी तो नहीं । कौन देख रहा है , आपको ? किससे डर रहे हैं , आप ? यदि अपनी गलतियों को आप स्वयं नहीं देख सकते तो और कौन देखेगा ?

समय गुरुओं का भी गुरु है , पर्त दर पर्त  गलतियों को दिखाता रहता है लेकिन एक हम हैं जो आँख खोलना ही नहीं चाहते , ऐसी परिस्थिति में हम अपने जीवन यात्रा में बार -बार ठोकरे खाते रहते हैं और चलते रहते हैं ।

इस यात्रामें जीवन का सूरज कब , कहाँ और कैसे डूब जाता है , आहट भी नहीं मिल पाती ।

जीवन यात्रा में कितनी यात्रा हुयी , कितनी बाकी है , इस मुद्दे पर कभीं न सोचना लेकिन इस बात पर हर पल सोचते रहना कि यात्रा होश पूर्ण कर रहे हो या बेहोशी में कर रहे हो !


Wednesday, March 31, 2021

सांख्य कारिका - 3 का शेष भाग

 पिछले अंक में सांख्य कारिका - 3 के आधार पर 25 तत्त्वों को दिखता गया और अब तन्मात्र , महाभूत , 05 ज्ञान इंद्रियों एवं 05 कर्म इंद्रियों के सम्बन्ध को देखते हैं 👇



Sunday, March 28, 2021

कपिल मुनि सांख्यदर्शन में मूल प्रकृति

 यहाँ यह दिखाया जा रहा है कि जड़ प्रकृति के ऊपर जब चेतन पुरुष का प्रकाश पड़ता है तब वह सक्रिय हो उठती है और उसके विकृत होनें से पहले सर्ग महत् ( बृद्धि ) की उत्पत्ति कैसे होती है ? और यहाँ से कारण - कार्य सांख्य सिद्धान्त का श्रीगणेश कैसे होता है ?

सृष्टि विकास की पूरी गणित सांख्य दर्शन देता है जिस सिद्धान्त को वैज्ञानिक ढूढ रहे हैं ।

आइये ! हम सब अब सावधानी के  साथ उतरते हैं , इस गणित में 👇



Saturday, March 27, 2021

सांख्य कारिका - 3 भाग - 1

 ईश्वरकृष्ण रचित सांख्य कारिकाओं की श्रंखला में आज हम तीसरी कारिका के भाग - 1 को देख रहे हैं।

तीन गुणों के साम्यावस्था का माध्यम , मूल प्रकृति है । इस अवस्था में यह निष्क्रिय होती है लेकिन इसे ज्योंकी पुरुष का प्रकाश मिलता है , यह सक्रिय हो उठती है और संर्गों की उत्पत्ति होती है । संर्गों से विसर्गों की उत्पत्ति ब्रह्मा द्वारा रचित है ।

देखिये निम्न स्लाइड को 👇



Friday, March 26, 2021

सांख्य कारिका - 2

 आज हम सांख्य कारिका - 2 को देख रहे हैं ।यहाँ तीन प्रकार के दुःखों को निर्मूल करने का उपाय बताया जा रहा है । दुःखों को दूर करने और निर्मूल करने को ठीक से समझना चाहिए । दुःखों को दूर करने के बाद भी दुःख लौट आते हैं क्योंकि उनके बीज हमारे अंदर रहते हैं। निर्मूल में दुःखों के बीज भी नष्ट हो जाते हैं अतः दुःखों की पुनरावृत्ति नहीं हो पाती । सांख्य दर्शन तीन प्रकार के दुःखों को निर्मूल करने का उपाय तत्त्व - ज्ञान बोध को बता रहा है , देखिये यहाँ👇



Thursday, March 25, 2021

सांख्य में तीन प्रकार के दुःख

 पिछले अंक में ईश्वर कृष्ण रचित सांख्य कारिका : 1भाग - 1 में कारिका के भाव को  समझा गया और अब भाग - 2 के अंतर्गत 03 प्रकार के दुःखों को समझते हैं ।

भारतीय दर्शन दुःख निवृत्ति और आवागमन से मुक्ति पाने के आधार पर विकसित हुए हैं ।

सांख्य - पतंजलि बहुत सुंदर योग की गणित देते हैं । यदि आप कौन सुनता है के साथ बने रहे तो आप ....

विषय से वैराग्य , वैराग्य में क्रमशः सम्प्रज्ञात समाधि , असम्प्रज्ञात समाधि , लिङ्ग लय , प्रकृति लय , कैवल्य और अंततः मोक्ष तक की मानसिक यात्रा को ठीक - ठीक समझ सकते हैं ।

चलिये , लौटते हैं 03 प्रकार के दुःखों पर 👇



Wednesday, March 24, 2021

सांख्य कारिका - 1 भाग - 1

 कपिल मुनिके  सांख्य दर्शन में ईश्वर कृष्ण द्वारा लिखी गयी 72 सांख्य कारिकाओं से हम मिल रहे हैं । 

इस यात्राके आज पहले दिन पहली कारिका से मिल रहे हैं । इस कारिका को दो भागों में दिया जा रहा है , आशा है , आप हमारे साथ बने रहेंगे ।

भारतीय दर्शन दुःख केंद्रित हैं और सांख्य दुःखों से मुक्त होने की दवा रूप में तत्त्व ज्ञान देता है ।

प्रस्तुत है , कारिका - 01 भाग - 1 👇