Saturday, July 13, 2019

वेदनासे वैराग्य तक की यात्रा

वेदना और वैराग्य

दोनों में गहरा संबंध है।
देखिये !
इस स्लाइड में 
// ॐ //

Sunday, May 19, 2019

परमहंस योगानंद : भाग - 1

परमहंस योगानंद जी से सम्बंधित कुछ जानकारी यहाँ सेवर्पित की जा रही है जो उनकी पुस्तक ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ ए योगी आधारित है ।

परमहंस योगानंद भाग - 1


Friday, August 21, 2015

कतरन - 17

* कतरन -17 *
1 - परोपकारकी बातें करनें वाला मनुष्य स्वयंकी चाहको पूरा करनें में कौनसी कसर छोड़ रहा है ?
2 - सुरक्षा एक कारण है कि सभीं जीव झुण्ड
(परिवार )में रहते हैं और ज्योंही अपनें परिवार से अलग हो जाते हैं , उनमें अधिकाँश किसी और जीवका भोजन बन जाते हैं । क्या कारण हो सकता है कि आज मनुष्य परिवार में रहना पसंद नहीं कर रहा ?
3 - जो बुद्धि लालच की गुलाम है , उसे सभीं अपनें दिखते हैं , जबतक कुछ पानें की उम्मीद होती है पर ज्योंही उम्मीद टूटती है , सारा नक्शा बदल जाता है ।
4 - देखो सबको पर देखनें से अपनीं शांति न खोओ ,आपके पास जो है , उसे ही प्रभूका प्रसाद समझ कर मस्त रहो।
5 - आपके पास 11 इन्द्रियाँ , मन और अहंकार हैं जो आपको मस्त नहीं रहनें देना चाहते और इन सबके ऊपर एक वह परम ऊर्जा भी है जिसे जीवात्मा कहते हैं और जिसका देह में , हृदय केंद्र है ,वह मस्त रखना चाहती है । इस समीकरण को संतुलित करता है ,
ध्यान ।
~~~ ॐ ~~~

Wednesday, June 17, 2015

कतरन - 16

* मौनका आकर्षण अतुल्य है
* मौनका आकर्षण ध्यानकी गहराई के साथ सघन होता चला जाता है ।
* ध्यानकी गहराई के प्रवेश द्वार पर पहले जो प्रसाद मिलता है यह है मौन ।
* मौन जब पकता है तब वह ध्यानीको द्रष्टा - साक्षी बना देता है ।
* मौन सत्यका बसेरा है ।
* मौन घटित होनें पर अंतः करण निर्विकार अवस्था में शुद्ध हीरे की तरह विकिरण द्वारा जो किरणें फैलाता रहता है , वे किरणें चरों तरफ एक परम ऊर्जा का क्षेत्र निर्मित करती हैं । वह जो जगना चाह रहा होता है , वह इस ऊर्जा क्षेत्र से आकर्षित होता चला जाता है । उसका यह आकर्षण उसे मौनी बना देता है ।
~~~ ॐ ~~~