Wednesday, September 21, 2022
Monday, September 19, 2022
भारतीय पुराणों में 64 संख्या का महत्त्व
इस शृंखला में 64 योगिनियों , 64 विद्यायें , 64 पैसो की एक रूपया और महाभारत युद्ध का कारण चौसर द्यूत क्रीड़ा में 64 खानों के होने के रहस्यों में झांकने जा यत्न किया जाएगा लेकिन पहले निम्न स्लॉइड को समझें । सारी सूचनाएँ नेट से एकत्र की गयी हैं ⬇️
Tuesday, September 13, 2022
Saturday, September 10, 2022
Friday, September 9, 2022
Monday, September 5, 2022
पतंजलि योग दर्शन में वैराग्य क्या है ?
पतंजलि योग दर्शन ऐजं वैराग्य समाधि का द्वार बताया गया है । आइये देखते हैं निम्न 05 स्लाइड्स को जो वैराग्य को स्पष्ट करती हैं ✌️
Sunday, September 4, 2022
Saturday, September 3, 2022
पतंजलि योग में अष्टाङ्ग योग के 05 प्रमुख अंगों आसन , प्राणायाम , धारणा , ध्यान और समाधि की परिभाषाएँ
पिछले अंक में आसन , प्राणायाम , धारणा , ध्यान और समाधि के आपसी संबंधों को देखा गया और अब इनकी परिभाषाओं को समझते हैं ।
Thursday, September 1, 2022
पतंजलि योग साधना के 05 चरण
पतंजलि योग साधना के 05 चरण जो कैवल्य के मार्ग हैं 👇
ऊपर व्यक्त 05 पतंजलि योग सिद्धि के चरणों में उनके आपसी संबंधों को समझ लेना चाहिए ।
जब आसन - सिद्धि मिल जाती है तब उस आसन का प्रयोग आगे के चरणों की सिद्धियों में भी प्रयोग करना होता है । आसन सिद्धि उसे कहते हैं जब योगी पूरे दिन एक ही देह मुद्रा में बैठे - बैठे समयातीत की स्थिति में पहुंच जाता है अर्थात उसे लंबे समय बीत जाने का पता तक नहीं लग पाता ।
आसन सिद्धि में प्राणायाम की साधना प्रारंभ होती है । श्वास - प्रश्वास का द्रष्टा बन कर दोनों श्वासों को देखते रहने का अभ्यास जब गहरा जाता है तब दोनों श्वासें स्वतः रूक जाती हैं जिसे प्राणायाम (प्राण + आयाम ) कहते हैं ।
जब प्राणायाम - अभ्यास सिद्ध हो जाता है तब धारणा का द्वार खुल जाता है । आसन - अभ्यास में स्थूल देह आलंबन था , प्राणायाम में श्वास - प्रश्वास आलंबन थे और अब धारणा में कोई सात्त्विक आलंबन पर चित्त को एकाग्र करना होता है । महर्षि पतंजलि धारणा को परिभाषित करते हुए कहते हैं , किसी सात्त्विक आलंबन पर चित्त का टिक जाना , धारणा है । जब धारणा सिद्ध होती है तब ध्यान का द्वार स्वतः खुल जाता है । धारणा की अखंडित देर तक बने रहना , ध्यान है । ध्यान सिद्धि से सम्प्रज्ञात समाधि में प्रवेश मिलता है । साकार समाधि को सम्प्रज्ञात समाधि कहते हैं ।
धारणा , ध्यान और साकार समाधि का एक आसन में स्थित रहते हुए एक साथ जब सिद्ध होते हैं तब उसे संयम कहते हैं । संयम से सिद्धियाँ मिलती हैं जो पतंजलि योग साधना के अवरोध हैं । जो सिद्धियों से विचलित नहीं होते , वे सम्प्रज्ञात समाधि से असम्प्रज्ञात समाधि , असम्प्रज्ञात समाधि से धर्ममेघ समाधि और धर्ममेघ समाधि से कैवल्य की यात्रा करते हैं जहां पुरुषार्थ शून्य हो जाता है , तीन गुण प्रतिप्रसव अवस्था में होते हैं और इस स्थिति में यदि शरीर छूट जाए तो वह योगी आवागमन से मुक्त हो जाता है जिसे मोक्ष कहते हैं । आगे चल जरं साधना के इन 05 चरणों को देखा जा सकेगा ।
।। ॐ ।।
Saturday, August 27, 2022
Friday, August 26, 2022
पतंजलि कैवल्य पाद सूत्र : 33 > किसी वस्तु के सम्बन्ध में कैसा जाना जा सकता है
यहाँ महर्षि कहते हैं , जिस के बारे में जानना हो , उसकी संगति करो । उस के जीवन के हर पल को देखो और समझो । इस प्रकार कुछ समय बाद आप उस के संबंध में ठीक - ठीक ज्ञान अर्जित कर सकते हो । अब सूत्र को समझते हैं ⬇️
Monday, August 22, 2022
Saturday, August 20, 2022
Wednesday, August 17, 2022
पतंजलि कैवल्य पाद सूत्र : 27 - 30 > जब समाधि टूटती है जब क्या होता है !
अब हम पतंजलियोग सूत्र दर्शन के 195 सूत्रों की श्रृंखला के अंतिम सोपान पर हैं । कैवल्य पाद के 34 सुत्रीं में से आज हम 30 वें सूत्र तक की यात्रा पूरी करने जा रहे हैं ।
परमहंस गुरुदेव रांमकृष्ण जी की जब समाधि टूटती थी तो वे रोने लगते थे और माँ काली के सामने घुठने टेके बुदबुदाया करते थे कि माँ आप यह क्या कर दिए । मुझे वहीँ रहने देते , मैं वहीँ थीक था । परमहंस जी की इस बात को लोग समझ नहीं पा। रहे थे । लेकिन उनकी ऐसी स्थिति क्यों होती थी ? प्रश्न का उत्तर पतंजलि यहाँ दे रहे है। योगिराज पतंजलि कह रहे हैं , " जब समाधि टूटती है तब विवेक की धरा टूटती है और ऐसी स्थिति में संस्कारों की वृत्तियॉ सक्रिय हो उठती हैं , फल स्वरुप साधक पुनः चित्ताधारित हो जाता है । अब सुत्रों को देखें
Monday, August 15, 2022
Saturday, August 13, 2022
Friday, August 12, 2022
Thursday, August 11, 2022
कैवल्य पाद सूत्र - 19 > एक समय चित्त एक ही बिषय को पकड़ता है
पतंजलि का यह सूत्र ऐसा है जो उस सत्य को दिखा रहा है जो हमते जीवन के हर पल में घटित होता रहता है लेकिन हम इससे अनभिज्ञ बने रहते हैं । ध्यान से दो पल के लिए अपनें मन में चल रहे विचारों को देखने का यत्न करे । आप देखेंगे कि मन एक समय में एक ही बिषय पर मनन करता है और जब वह बिषय लुप्त हो जाता है तब दूसरा बिषय प्रकट हो जाता है और यह
यह प्रक्रिया योंही चलती रहती हैं । मन एक समय में दो बिषयों पर मनन नहीं करता और पतंजलि इसी बात को कैवल्य पाद सूत्र - 19 में बता रहे हैं । अब आइये देखते हैं इस सूत्र को
Wednesday, August 10, 2022
कैवल्य पाद सूत्र : 15 - 18 > पुरुष , चित्त और संसार सम्बन्ध
यहाँ 03 स्लाइड्स में सांख्य सिद्धांतों को महर्षि पतंजलि स्पष्ट कर रहे हैं -
1- चित्त और पुरुष सम्बन्ध और उनके गुण
2 - संसार और संसार की वस्तुएं किसी एक चित्ताधीन नहीं
3 - संसार को चीत्त केंद्रित पुरुष चित्त पर बन रहे संसार के प्रतिविम्व के माध्यम से समझता है । अब स्लाइड्स देखे
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