एक झलक ⬇️
अब आगे ⤵️अध्याय : 05 का सार..
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एक झलक ⬇️
अब आगे ⤵️अध्याय : 05 का सार..
क्र सं | बिषय | श्लोक |
1 | अर्जुन का प्रश्न कर्मीयोग - कर्मसंन्यास | 2 |
2 | प्रभु के श्लोक | 2 - 29 |
2.1 | ● समभाव ●सांख्ययोग और कर्म योग ● कर्म योग से कर्म संन्यास ◆ तत्त्ववित् ◆कर्म आसक्ति ◆ कर्मफल | X |
2.2 | ●प्रभु के सम्बन्ध में ◆ ज्ञान ● समदर्शी ◆ ब्रह्म # इंद्रिय - बिषय संयोग भोग है # योगी कौन ब्रह्मनिर्वाण , यज्ञ ★ आज्ञाचक्र पर ध्यान | X |
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एक झलक ⬇️
🌷अध्याय : 03 के आकर्षण ⬇
➡ कर्म मनुष्य स्वयं नहीं करता , उसके अंदर स्थित प्रकृति मूलक तीन गुण कर्म करवाते हैं तथा करता का भाव अहँकार की उपज है ।
➡ देह में स्थित तीन गुणों में हो रहा हर पल परिवर्तन , कर्म करने की ऊर्जा उत्पन्न करता है ।
➡ माया त्रिगुणी है और हम आत्मा - माया के योग हैं ।
➡ हठात् कर्म इंद्रियोंका नियोजन करना मूढ़ता लाता है क्योंकि मन तो बिषयों का चिंतन करता ही रहता है अतः मनसे इंद्रिय नियोजन होना चाहिए ।
➡ राजस गुण से उत्पन्न कामका रूपांतरण ही क्रोध है जो पाप करवाता है ।
अध्याय : 3 के ध्यानोपयोगी श्लोक ⤵️
क्र सं | श्लोक | बिषय |
4,5,19 - 20 27 - 29 ( 7 ) | कर्म , गुण - कर्म विभाग | |
6 , 7 , 34 (3) | इन्द्रिय नियोजन +बिषय | |
17 , 18 (2) | आत्मा केंद्रित | |
37 - 43 (8) टोटल - 20 | काम |
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एक झलक
गीता अध्याय - 02 में श्लोकों की स्थिति⬇️
प्रभुश्रीकृष्ण | संज्जय | अर्जुन | योग |
63 | 03 | 06 | 72 |
☸️इस अध्याय में निम्न बिषयों पर चर्चा की गयी है ⬇️
क्र सं | बिषय | श्लोक | योग |
1 | ● मोह ● पंडित ● पिछले जन्म की स्मृति में लौटना | 1 - 12 | 12 |
2 | आत्मा | 13 - 30 | 18 |
3 | ● कर्मयोग ● वेद और भोग ◆ दो बुद्धियाँ | 31 - 52 | 22 |
4 | स्थिरप्रज्ञ | 53 - 72 | 20 |
योग | ➡️ | ➡️ | 72 |
🕉️ आत्मा ⤵️
श्लोक : 2.13 - 2.30 ( 18 श्लोक )
● जीवात्मा का देह त्याग और देह धारण करना ,धीर पुरुष को मोहित नहीं करता ।
● जीवात्मा अविनाशी , अप्रमेय और नित्य है जबकि देह नाशवान है।
● नायं हन्ति न हन्यते ( 2.19 ) आत्मा न मारता है और न मारा जाता है ।
● न हन्यते हन्यमाने शरीरे ( 2.20 ) शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मारा जाता ।
◆ आत्मा जन्म - मरण से अप्रभावित , अजन्मा ,
नित्य , सनातन और पुरातन है ।
◆ आत्मा - बोधी न मारता है , न मरवाता है ।
◆ आत्मा पुराने देह को त्याग कर नया देह धारण
करता है ।
◆ आत्माको काटा नहीं जा सकता , जलाया नहीं जा
सकता , घुलाया नहीं जा सकता और सुखाया नहीं जा सकता ।
◆ आत्मा अच्छेद्य , अदाह्य , अक्लेद्य , सर्वव्यापी , अचल , सनातन ,अव्यक्त , अचिन्त्य और निर्विकार है।
◆ आत्माको कोई आश्चर्य से देखताहै । कोई आश्चर्य से आत्मा के सम्बन्ध में सुनता है तो कोई तत्त्व से आत्मा को जानता है । ज्यादातर लोक सुनकर भी आत्मा को नहीं जानते !
★ सभीं भूत जन्म पूर्व अव्यक्त थे , मरने के बाद भी अव्यक्त हो जाते हैं , इन दो के मध्य की उनकी स्थिति व्यक्त की है फिर ऐसी स्थिति में किसी के लिए शोक क्या करना !
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एक झलक
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय - 01
श्लोकों की संख्या ⬇️
पात्र | श्लोक 👇 | योग |
धृतराष्ट | 1 | 01 |
सज्जय | 2 - 20 + 24 - 27 + 47 | 24 |
अर्जुन | 21 - 23 + 28 - 46 | 22 |
कृष्ण | 00 | 00 |
योग | -- | 47 |
गीता अध्याय - 1 के आकर्षण ⤵
1- इस अध्याय में प्रभु श्रोता है और अर्जुन वक्ता ।
2 - मोहके 06 लक्षण ( श्लोक : 1.28 - 1.30 में )
निम्न प्रकार से बताये गए हैं 👇
1 - अंगोंका शिथिल होना ।
2 - मुख का सूखना ।
3 - शरीरमें कंपन होना ।
4 - रोमांच होना ।
5 - त्वचामें जलन होना ।
6 - मनका भ्रमित होना ।
👉 ध्यान रहे कि मोह , भय . निद्रा और आलस्य तामस गुण के तत्त्व हैं ।
☸यहाँ देखे गीता अध्याय : 14 श्लोक : 8 + 13 जो कहते हैं ⬇️
1 - अज्ञान जनित मोह , प्रमाद , आलस्य और निद्रा , तामस गुण के तत्त्व हैं ।
2 - तामस गुण के प्रभाव में इंद्रियों में अप्रकाश कर्त्तव्य कर्मों में अप्रवृत्ति और प्रमाद एवं निद्रा से मनुष्य ग्रसित रहता है ।
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प्रभु श्री कृष्ण और संख्या - 18
● महाभारत में 18 पर्व हैं
★ श्रीमद्भागवत पुराण में 18,000 श्लोक हैं
◆ जरासंध मथुरा पर 18 बार आक्रमण किया
● गीतामें 18 अध्याय हैं
◆ महाभारत युद्ध 18 दिन चला
● युद्ध में 18 अक्षौहिणी सेनाएं भाग ली
और अब आगे ⬇️
● एक अक्षौहिणी में 21870 रथ और इतने ही हाँथी थे ।
● ऊपर की संख्या 21870 के अंकों के जोड़ को देखिये ( 2 + 1 + 8 +7 + 0 = 18 ) ; है , न मजेदार गणित !
● घुड़सवारों की संख्या 65,610 थी अब इस सांख्य के अंकों के योग को देखें ( 6 + 5 + 6 + 1 + 0 = 18 ) , यह गणित भी कैसी लगी , आपको !
● पैदल योद्धाओं की संख्यस 1, 09, 350 थी , अब इस संख्या के अंकों के जोड़ को देखिये ( 1 + 0 + 9 + 5 + 0 = 18 ) ; है , न मजेदार गणित !
🌷रथ , हांथी , घुड़सवार और पैदल सैनिकों की संख्यायों में 1:1:3:5 का अनुपात था ।
अब इसे भी देखें ⤵️
🌷 महाभारत युद्ध में 18 अंक के गहरे राज में 1 + 8 = 9 अर्थात 9 ग्रह की छाया को भी समझ लें 🌷