Thursday, December 9, 2021

गीता अध्याय - 5 की एक झलक

 


एक  झलक ⬇️

अब आगे ⤵️अध्याय : 05 का सार..

क्र सं

बिषय

श्लोक

1

अर्जुन का प्रश्न 

कर्मीयोग - कर्मसंन्यास

2

2

प्रभु के श्लोक 

2 - 29 

2.1

समभाव ●सांख्ययोग और कर्म योग 

● कर्म योग से कर्म संन्यास

◆ तत्त्ववित् ◆कर्म आसक्ति ◆ कर्मफल

X

2.2

●प्रभु के सम्बन्ध में 

◆ ज्ञान ● समदर्शी ◆ ब्रह्म 

# इंद्रिय - बिषय संयोग भोग है # योगी कौन 

ब्रह्मनिर्वाण , यज्ञ 

★ आज्ञाचक्र पर ध्यान

X


◆◆ ॐ ◆◆~~

Tuesday, December 7, 2021

गीता अध्यात - 3 की एक झलक

 


एक  झलक ⬇️

🌷अध्याय : 03 के आकर्षण

कर्म मनुष्य स्वयं नहीं करता , उसके अंदर स्थित प्रकृति मूलक तीन गुण कर्म करवाते हैं तथा करता का भाव अहँकार की उपज है ।

➡ देह में स्थित तीन गुणों में हो रहा हर पल परिवर्तन , कर्म करने की ऊर्जा उत्पन्न करता है ।

➡ माया त्रिगुणी है और हम आत्मा - माया के योग  हैं । 

➡ हठात्  कर्म इंद्रियोंका नियोजन करना मूढ़ता लाता है क्योंकि मन तो बिषयों का चिंतन करता ही रहता है अतः मनसे इंद्रिय नियोजन होना चाहिए । 

➡ राजस गुण से उत्पन्न कामका रूपांतरण ही क्रोध है जो पाप करवाता है ।

   अध्याय : 3 के ध्यानोपयोगी श्लोक ⤵️

क्र सं

श्लोक

बिषय 


4,5,19 - 20 27 - 29  ( 7 )

कर्म , गुण - कर्म विभाग


6 , 7 , 34 (3)

इन्द्रिय नियोजन +बिषय


17 , 18 (2)

आत्मा केंद्रित


37 - 43 (8)

टोटल - 20

काम


◆◆◆◆~~

Monday, December 6, 2021

गीता अध्याय - 2 की एक झलक

 



एक झलक 

गीता अध्याय - 02 में श्लोकों की स्थिति⬇️

प्रभुश्रीकृष्ण

संज्जय

अर्जुन

योग

63

03

06

72


☸️इस अध्याय में निम्न बिषयों पर चर्चा की गयी है ⬇️

क्र सं

बिषय

श्लोक

योग

1

● मोह 

● पंडित

 ● पिछले जन्म की स्मृति में लौटना

1 - 12

12

2

आत्मा

13 - 30

18

3

● कर्मयोग

● वेद और भोग

दो बुद्धियाँ  

31 - 52

22

4

स्थिरप्रज्ञ

53 - 72

20

योग

➡️

➡️

72


🕉️ आत्मा ⤵️

श्लोक : 2.13 - 2.30 ( 18 श्लोक )

  जीवात्मा का देह त्याग और देह धारण करना ,धीर पुरुष को मोहित नहीं करता । 

जीवात्मा अविनाशी , अप्रमेय और नित्य है जबकि देह नाशवान है।

 ● नायं हन्ति न हन्यते ( 2.19 ) आत्मा न मारता है और न मारा जाता है । 

● न हन्यते हन्यमाने शरीरे ( 2.20 ) शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मारा जाता ।

◆ आत्मा जन्म - मरण से अप्रभावित , अजन्मा ,

 नित्य , सनातन और पुरातन है । 

◆ आत्मा - बोधी न मारता है , न मरवाता है ।

◆ आत्मा पुराने देह को त्याग कर नया देह धारण 

करता है ।

◆ आत्माको काटा नहीं जा सकता , जलाया नहीं जा

सकता , घुलाया नहीं जा सकता और सुखाया नहीं जा सकता ।

◆ आत्मा अच्छेद्य , अदाह्य , अक्लेद्य , सर्वव्यापी , अचल , सनातन ,अव्यक्त , अचिन्त्य और निर्विकार है।

◆ आत्माको कोई आश्चर्य से देखताहै । कोई  आश्चर्य से  आत्मा के सम्बन्ध में सुनता है तो कोई तत्त्व से आत्मा को जानता है । ज्यादातर लोक  सुनकर भी आत्मा को नहीं जानते !

★ सभीं भूत जन्म पूर्व अव्यक्त थे , मरने के बाद भी अव्यक्त हो जाते हैं , इन दो के मध्य की उनकी स्थिति व्यक्त की है फिर ऐसी स्थिति में किसी के लिए शोक क्या करना !

~~◆◆ ॐ ◆◆~~

Sunday, December 5, 2021

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय - 1 एक झलक

 


एक झलक 

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय - 01 

श्लोकों की संख्या ⬇️

पात्र 

श्लोक 👇

योग

धृतराष्ट

1

01

सज्जय

2 - 20 + 24 - 27 + 47

24

अर्जुन

21 - 23 + 28 - 46

22

कृष्ण

00

00

योग

--

47


गीता अध्याय - 1 के आकर्षण ⤵

1- इस अध्याय में प्रभु श्रोता है और अर्जुन वक्ता

2 - मोहके 06 लक्षण ( श्लोक : 1.28 - 1.30 में ) 

 निम्न प्रकार से बताये  गए हैं 👇

1 - अंगोंका शिथिल होना ।

2 - मुख का सूखना ।

3 -  शरीरमें कंपन होना ।

4 - रोमांच होना ।

5 - त्वचामें जलन होना ।

6 - मनका भ्रमित होना ।

👉 ध्यान रहे कि मोह , भय . निद्रा और आलस्य तामस गुण के तत्त्व हैं ।

☸यहाँ देखे गीता अध्याय : 14 श्लोक : 8 + 13 जो कहते हैं ⬇️

1 - अज्ञान जनित मोह , प्रमाद , आलस्य और निद्रा , तामस गुण के तत्त्व हैं ।

2 - तामस गुण के प्रभाव में इंद्रियों में अप्रकाश कर्त्तव्य कर्मों में अप्रवृत्ति और प्रमाद एवं निद्रा से मनुष्य ग्रसित रहता है ।

~~◆◆ ॐ◆◆~~

Friday, December 3, 2021

संख्या - 18 और प्रभु श्री कृष्ण

 


प्रभु श्री कृष्ण और संख्या - 18

महाभारत में  18 पर्व  हैं 

★ श्रीमद्भागवत पुराण में 18,000 श्लोक हैं

◆ जरासंध मथुरा पर 18 बार आक्रमण किया 

● गीतामें   18 अध्याय हैं 

◆ महाभारत युद्ध  18 दिन चला 

● युद्ध में 18 अक्षौहिणी सेनाएं भाग ली  

और अब आगे ⬇️

एक अक्षौहिणी में 21870 रथ और इतने ही हाँथी थे ।

● ऊपर की संख्या 21870 के अंकों के जोड़ को देखिये ( 2 + 1 + 8 +7  + 0 = 18 ) ; है , न मजेदार गणित !

● घुड़सवारों की संख्या  65,610 थी अब इस सांख्य के अंकों के योग को देखें ( 6 + 5 + 6 + 1 + 0 = 18 ) , यह गणित भी कैसी लगी , आपको !

 ● पैदल योद्धाओं की संख्यस 1, 09, 350 थी , अब इस संख्या के अंकों के जोड़ को देखिये  ( 1 + 0 + 9 + 5 + 0 = 18 ) ;  है , न मजेदार गणित ! 

🌷रथ , हांथी , घुड़सवार और पैदल सैनिकों की संख्यायों में 1:1:3:5 का अनुपात था । 

अब इसे भी देखें ⤵️

🌷  महाभारत युद्ध में 18 अंक के गहरे राज में 1 + 8 = 9 अर्थात 9 ग्रह की छाया को भी समझ लें 🌷