प्रमुख भारतीय दर्शनों का केंद्र दुःख है
निम्न टेबल में बौद्ध दर्शन , सांख्य दर्शन , पतंजलि योग दर्शन , जैन दर्शन और अद्वैत वेदांत दर्शन (उत्तर मीमांसा दर्शन)एन उपलब्ध दुःख के विज्ञान को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। यदि आप इन 05 दर्शनों के दुखी विज्ञान को ध्यान से देखें तो यह स्पष्ट होता है कि अज्ञान (अविद्या) दुःख की जननी है।
क्र सं | दर्शन | मूल सिद्धांत |
01 | बौद्ध | चार आर्य सत्य (Four Noble Truths) ⤵️ 1.संसार में दुख है 2. दुःख के कारण हैं 3.दुख के निवारण है 4. दुःख निवारण के मार्ग हैं दुःख निवारण का मार्ग ⤵️ अष्टांग मार्ग 
सम्यक दृष्टि, संकल्प, वाक्य, कर्म, आजीविका, व्यायाम , स्मृति, समाधि तीन प्रशिक्षण: प्रज्ञा , शील , समाधि |
02 | सांख्य
| <> तीन प्रकार के दुःख हैं ⤵️ आध्यात्मिक ,आधिभौतिक , आधिदैविक <> दुःख मुक्ति का उपाय : तत्त्व ज्ञान मूल प्रकृति , इसके 23 तत्त्वों एवं पुरुष का यथार्थ बोध , तत्त्व ज्ञान है । |
03 | योग दर्शन
| दुख के हेतु पञ्च क्लेश हैं ⤵️ (अविद्या,अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश ) दुःख मुक्ति के उपाय अष्टांगयोग 
यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान,संप्रज्ञात समाधि। योग सिद्धि का फल ⤵️ कैवल्य प्राप्ति तीन गुणों का प्रतिप्रसव होना , पुरुषार्थ का शून्य हो जाना या चित्त केंद्रित पुरुष का अपने मूल स्वरूप में स्थित हो जाना , कैवल्य है। जबतक कैवल्य नहीं मिलता , आवागमन में रहना होगा और सुख - दुःख को भोगते रहन होगा। |
04 | जैन
| # कर्म बंधन , दुःख के हेतु हैं (आसक्ति , कामना , क्रोध , लोभ , मोह , भय , आलस्य , अहंकार ) # दुख मुक्ति के उपाय <> त्रिरत्न की सिद्धि ⤵️ 1.सम्यक दर्शन 2.सम्यक ज्ञान 3.सम्यक चरित्र बंधनमुक्त कर्म से कैवल्य प्राप्ति । कैवल्य अर्थात आवागमन से मुक्त होना। <> महाव्रत ⤵️ में स्थिर होना अहिंसा,सत्य,अस्तेय,ब्रह्मचर्य,अपरिग्रह |
05 | वेदांत अद्वैत | दुःख का कारण ब्रह्म और जीव में भेद का भ्रम (अविद्या) पूर्ण मुक्ति का उपाय (मोक्ष) माया - ब्रह्म का यथार्थ बोध ,अविद्या से मुक्त करता है। ज्ञान क्या है ⬇️ (ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः) <। <> ज्ञान से मोक्ष प्राप्ति |
<> अगले अंक में व्रत , अणु व्रत और महाव्रत जो समझा जायेगा <>
~~ प्रज्ञानं ब्रह्म ~~
No comments:
Post a Comment