Sunday, August 4, 2013

दो पल ही सही जरा सोचना


  • कौन छोट है , कौन बड़ा है , यह सोच कहाँ से उठती है ?
  • कौन सुन्दर है , कौन कुरूप है , यह सोच कहाँ से उठती है ?
  • कौन अपना है , कौन पराया है  , यह सोच कहाँ से उठती है ?
  • अनुभवहीन ब्यक्तिकि ज्ञान की बातें रस रहित होती हैं , क्यों ?
  • कहते हैं नानक दुखिया सब संसार , लेकिन मौत के नाम पर सभीं सिकुड़ते हैं , क्यों ?
  • हम अपनें दुःख का कारण और को क्यों बनाते हैं ?
  • सभीं परेशान है स्वयं से नहीं औरों से , क्यों ?
  • आज नहीं तो कल ही सही कुछ पानें कि उम्मीद हमें एक दूसरे से जोड़ कर रखती है , क्यों ?
  • कामना टूटते ही क्रोध क्यों उठता है ?
  • कामना का अंत क्यों नहीं है ?
  • दुःख में सभीं सिकुड़ते हैं और सुख में फैलते ते हैं , क्यों ?

===== ओम्  =====



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