Thursday, August 11, 2011

यहाँ कौन है बेईमान

यहाँ कौन बेईमान है ?

राजा ?

प्रशासक ?

या …

फिर जनता //


प्रजा तंत्र में राजा की नियुक्ति प्रजा के हाँथ में है और भारत की जनता पिछले कई सालों से किसी एक दल को मौक़ा नहीं दे रही पूर्ण बहुमत वाली सरकार बननें के लिए लेकिन कई दल मिल कर सरकार बना ले रहे हैं / आज देश उनके हांथों में नहीं जिनके पास ज्यादा जन प्रतिनिधी हैं अपितु उनके हाथों में है जिनकी संख्या अल्प है लेकिन उनके अंदर इतनी शक्ति है कि वे जब चाहें सरकार को गिरा सकते हैं /


आज जहां भी देखो यही देखनें को मिल रहा है कि भारत भ्रष्टाचार की ऊर्जा से जीवित है ; क्या सरकार बदलनें से भारत में मुह में अमृत की बूँदें पड़ सकती हैं ? भारत की सरकारें बदलती रही हैं लेकिन सरकारों के बदलाव से भ्रष्टाचार मजबूत होता रहा , ऐसा क्यों ? भारतीय प्रजातंत्र के इतिहास में आज तक जितनें दल बनें हैं सब यह कह कर जनता के सामनें गए हैं कि मेरे को मौक़ा दो मैं भारत में राम राज्य ला कर दिखाऊंगा लेकिन पिछले साठ सालों में क्या हुआ , ज़रा देखो तो सही ?


कहीं धमाका हो जाए , मंत्री को कुर्सी छोडनी पड़ती है लेकिन वहाँ के IPS , IAS अधिकारियों की कुर्सी पर कोई असर नहीं पड़ता , ऐसा क्यों ? भारत को कौन चला रहा है ? जन प्रतिनिधी या IAS अफ़सर ?

सभीं सरकारी मोहकमों का उच्च अधिकारी IAS अफ़सर है और लगभग सभीं मुहकमें घाटे में चल रहे हैं पर जो भी सरकार आती है वह इस बात पर ध्यान नहीं देती की आखिर प्राइवेट कंपनियां जहां एक भी IAS नहीं होता , सब मुनाफे में चल रहीं हैं और सरकारी कंपनियां जो IAS के हांथों में हैं सभीं घाटे में चल रही हैं , आखिर क्या कारण है ? घाटे वाली सरकारी कंपनी का चेयरमन प्रोमोसन ले कर कहीं और चला जता है और सरकार आम आदमी का पैसा इन कंपनियों में बहा रही है /


क्या कोई ऎसी भी सरकार आयेगी जो जो भारत के मूल भूत प्रशासकीय ढाँचे को बदल सके?


भारत की सरकारें नहीं जनता बेईमान है जो कमजोर सरकार का वातावरण तैयार कर रही है//

भारत के रग – रग में बेईमानी भर दी गयी है जहां तरह-तरह के बेईमान दिखते हैं----

कोई साधू के वेश में

कोई नेता के रूप में

कोई जनता सेवक के रूप में,बिचारा लोकायुक्त क्या कर सकता है?


====ओम======


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