Monday, June 11, 2012

जीवन दर्शन 54

  • बुद्ध पुरुष सुख एवं दुःख दोनों का चिकित्सक होता है

  • बुद्ध पुरुष न सुख देते हैं न दुःख

  • बुद्ध पुरुष उस आयाम में पहुंचाते हैं जहाँ से एक तरफ सुख औए एक तरफ दुःख दिखते हैं

  • बुद्ध पुरुष सुख एवं दुःख दोनों का द्रष्टा बनाते हैं

  • बुद्ध पुरुष वह रोशनी देते हैं जिससे सुख एवं दुःख दिखते हैं

  • बुद्ध पुरुष को खोजा नही जा सकता

  • बुद्ध पुरुष कहीं नहीं हैं और सर्वत्र हैं

  • बुद्ध पुरुष को देखनें की रोशनी ध्यान से मिलती है

  • ध्यान की गहराई में जब चेतना आत्मा को छूटी है तब उस घडी कोई बुद्ध वहाँ दिखते हैं

  • बुद्ध बताना तो वह सब चाहते हैं जिनकी अनुभूति उनको हुयी होती है

  • लेकिन …....

**इंद्रियों के माध्यम से अपनी अनुभूति ब्यक्त करनें की कोशिश अधूरी ही रहती है

**परम अनुभूति को इंद्रियों से ब्यत किया नही जा सकता

**परम सत्य ब्यक्त होते ही असत्य बन जाता है

**सत्य में वह जीता है जो गुणातीत होता है

**गुणातीत परम तुल्य होता है

**परम तुल्य योगी को जो समझता है वह स्वयं गुणातीत योगी ही होता है

**दो बुद्ध कभीं आपस में बातें नहीं करते

वे धन्य हैं जो बुद्ध - ऊर्जा क्षेत्र में रहते हैं

बुद्ध ऊर्जा क्षेत्र हैं - जैसे - कर्बला , काशी , मक्का , मानसरोवर , कैलाश , जेरुसलेम , द्वारका , उज्जैन , हरिद्वार , केदारनाथ , बद्रीनाथ , 51 शक्ति पीठें , 11 ज्योतिर्लिंगम के स्थान आदि

====ओम्=======



No comments:

Post a Comment