Monday, February 10, 2014

संसार और हम

** संसारकी हवाको कौन पहचानता है **
1- संसार एक रंगमंच है जहाँ सबको एक बराबर मौका मिलता है ,स्वयंके असली चहरे को पहचाननेंको और स्वयंकी जब ठीक - ठीक पहचान हो जाती है तब वह ब्यक्ति उस परमको समझ जाता है जिससे और जिसमें इस संसार रंगमंचका अस्तित्व है ।
2 - हम संसारका किनारा खोजनेंमें अपनें जीवनके आखिरी किनारे पर जा पहुँचते हैं पर संसारका किनारा कहाँ मिलता है ? मिले तो तब जब हो ।
3- यहाँ कुछ खोजनें की क्या जरुरत , जो मिला हुआ है क्या वह कम है ? भविष्य की खोज में हम जीवित वर्तमान को मुर्दा बना देते हैं ।
4- खोज चाह की रस्सी है , जितनी बड़ी चाह होगी उसकी रस्सी ( खोज ) भी उतनी लम्बी होगी ।
5- कामना में रस है जो अग्नि का रुप लेलेता है उस समय जब कामना टूटने का भय होता है।
~~~ ॐ ~~~

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