Tuesday, April 8, 2014

हमें सोचना है

● संसार एक ऐसा मंदिर है जिसकी मूर्तियाँ हर पल बदल रही हैं ।
● संसार एक पाठशाला है जहाँ कर्म एक ऐसा माध्यम है जो भोगमें योगका संगीत सुनाता है और योग परम धामका मार्ग दिखाता है ।
● संसार में मनुष्य से एक कण तक में ऐसा नहीं की संगीत न हो ,पर उस संगीत को कौन सुनना चाहता
है ?
● संसार रिश्तों की जाल है जिसमें फसनें के सभीं आसार हैं लेकिन इन रिश्तों को समझ कर कुछ उस परम रिश्ते में पहुँच जाते हैं जिसकी खोज ही मनुष्य जीवन का उद्देश्य है।
● फूल आपस में अपनें -अपनें परम विचारों का आदान -प्रदान करते रहते हैं लेकिन उनके इस विचारों के आदान -प्रदान को सुनता कौन है ?
● मंदिर में मूर्ति जो देखनें सभीं जाते हैं लेकिन मूर्ति के अन्दर जो है उसे देखनेंका प्रयाश करनें वाले दुर्लभ हैं ।
● ऐसा ब्यक्ति होना संभव नहीं जो चाह रहित हो लेकिन चाह रहित जो हो गया ,वह ब्रह्म वित् होता है । ● क्रोध समय - समय पर अपना रंग एक गिरगिट की भांति बदलता रहता है ,पर इसके इस कुशलता को कौन समझता है ?
● आप लोगों द्वारा क्यों सम्मानित हो रहे हैं ,क्या कभीं इस बिषय पर आप का ध्यान गया है ?
● जब भी हम सूर्य की पहली किरण देखते हैं ,हमारा एक नया जीवन प्रारम्भ होता है लेकिन इस नए जीवन को नए ढंग से जीनें की सोच कितनों में होती है ? ~~ ॐ ~~

1 comment:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीयचर्चा मंच पर ।।

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