Tuesday, October 2, 2012

जीवन दर्शन - 58

क्रोध और मोह की उर्जा देह में कंपन पैदा करती है
क्रोध - ऊर्जा की आवृति प्रति सेकण्ड अधिक होती है
मोह - उर्जा इन्द्रियों को सुखाता है
क्रोध - उर्जा नाश की ओर ले जाता है
कामना में जब गहरा अहँकार होता है तब जब वह कामना दूटती है , क्रोध उठता है
कमजोर अहँकार की कामना  - ऊर्जा मोह में बदल जाती है
कामना देह की कोशिकाओं में फैलाव लाता है
मोह कोशिकाओं को सिकोड़ता है
मोह का अहंकार बाहर से नही दिखता , यह अंदर सिकुड़ा रहता है
कामना का अहँकार बाहर परिधि पर छाया रहता है
==== ओम् ========

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