Tuesday, September 3, 2013

कुछ

●● कुछ ●●
1- इस देहको धोते रहनें केलिए इसे ढ़ोते रहो जबतक यह स्वतः निर्विकारमें न मिल जाए ।
2- आपसे जो कुछ भी हो रहा है उसे प्रभुका
आदेश - पालन समझ कर करते रहो , उसका करना ही प्रभु की पूजा है ।
3- न किसीसे प्रभावित होओ न किसीको प्रभावित करो ।
4- स्वयंमें उस रोशनीको तलाशते रहो जो अन्धकारमें भी आप जो राह दिखाती है ।
5- जबतक प्रभुकी खोज भोग आधारित होगी प्रभु आपको अब्यक्त ही रहेगा ।
6- पहले इस बातको सोचो कि आप प्रभुसे क्यों जुड़ रहे हो ? प्रभु इस बातको समझता है और वह दिखाई नहीं देता ।
7- संसार धोखा देने - लेने की मंडी बन गया है लेकिन प्रभुको क्यों धोखा दे रहे हो ?
8- अपनेंको कुछ भी बना लो लेकिन उसके सामनें तो सर स्वतः झुक जाता है ।
9- आज जो हैं कल वे न होंगे और जो कल होंगे वे परसों लुप्त हो जायेंगे चाहे वे नदी हों , पहाड़ हों या और कुछ हों लेकिन प्रभु कालसे अप्रभावित वैसा ही रहेगा ।
10- जितना बाहर देखते हो उसका 1/10 भाग भी अगर अपनें अन्दर देखनें का अभ्यास करो तो वह दिखनें लगेगा ।
~~~~ ॐ ~~~~

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