Wednesday, May 11, 2011


वह कहाँ नहीं हैं ?




कोई कहता है …..


God dwells in all




कोई कहता है …...


सबका मालिक एक




कोई कहता है …..


अलाह ओ अकबर




कोई कहता है …..


अहम् ब्रह्माष्मि




कोई कहता है …..


ला इलाही इल अलाह




कोई कहता है ….


नासतो विद्यते भावो


नाभावो विद्यते सत: [गीता- 2.16 ]




सबको इतनी होश तो है लेकिन फिर …....


हिंदू का मंदिर अलग है,मुस्लिम का मस्जिद अलग है,गिरिजा घर अलग है,गुरू द्वारा अलग है


यहूदियों का मंदिर अलग है,बुद्धों के मंदिर अलग हैं,जैनिओं के मंदिर अलग हैं,ऐसा क्यों है?




अनगिनत मार्ग हैं,अनगिनत दर्शन हैं,सब कुछ अनगिनत हैं लेकिन सब किस से और किसमें हैं?




गीता कहता है …...


असत्य सत्य की छाया है;छाया सत्य नहीं,चाँद की छाया चाँद नहीं है लेकिन चाँद की छाया से उलटी दिशा में यदि कोई यात्रा करे तो वह एक दिन सत्य चाँद को प्राप्त कर लेगा/


संसार की सभीं सूचनाएं उस से एवं उसमें हैं,जब उनमें वह दिखनें लगता है तब वह उस


ब्यक्ति के लिए निराकार नहीं रह पाता//


संसार का बोध ही परमात्मा को दिखाता है




======ओम=======


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