Thursday, November 14, 2013

ध्यानकी बातें


1- मनुष्य अपनें किये गये से फलके रूपमें सुख प्राप्ति चाहता है , कभीं जो क्षणिक सुख मिलता भी है वह दुःखमें बदल जाता है , क्यों ? क्योंकि मनुष्य गुणोंकी उर्जके प्रभावमें कर्म करता है । बिना गुणोंके प्रभावमेंआये कर्मको करना जिस कर्ममें फलकी कोई चाह न हो , यह सांख्य - योगके मूल सूत्र पर महाभारत युद्धमें प्रभु श्री कृष्णका एक अनूठा प्रयोग था जैसा और कहीं नहीं मिलता ।
2- कालके रूपमें सभीं घटनाओंमें वही होता है जिसका एक नाम काल भी है लेकिन विभिन्न रूपोंमें उसे पहचानना कठिन होता है ।
3-यह ब्रह्माण्ड और इसकी सभीं सूचनाएं किसी द्वारा नियंत्रित हैं या किसी नियमसे नियंत्रित हैं , यह कहना कठिन है लेकिन जो भी है , वह मन - बुद्धि सीमासे परे जरुर है ।
4- हिमायलके होनें में और एक फूलके होनें में एक ही रहस्य है और उस रहस्यको कोई नाम दिया जा सकता है पर उसकी परिभाषा करना संभव नहीं । 5- जीवन जितना सरल और सीधा होगा , जीनें का उतना ही गहरा अनुभव होगा ।
6- जीवन मिला हुआ है अनुभवसे स्वयंको पहचाननें केलिए और स्वयंकी पहचान ही प्रभुकी पहचान है । 7- चाहे जो करलो लेकिन जबतक तुम्हारा कर्म प्रभु केन्द्रित न होगा , तुम बेचैन ही रहोगे।
8- दुसरेके जीवनके रंगमें अपनें जीवनको न रंगों , तुम्हारा रंग भी उतना ही प्यार है , उसे पहचाननें की कोशिश करते रहो ।
9- दो श्वासोंके अंतरालमें जो घट रहा हो ,उसे देखो, यह ध्यान शिव पार्बती को सिखाया था।
10- बाहर जाती श्वासको साधो, इसी श्वाससे प्राण भी एक दिन बाहर निकलेगा ।
~~~ ॐ ~~~

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