Thursday, November 7, 2013

भागवत का एक अंश

● कृष्णका मथुरा और ब्रज - 1●
श्रीमद्भागवत पुराणमें ऐसा प्रसंग मिलता है कि प्रभाष क्षेत्रमें जहाँ सरस्वती नदी अरब सागरमें गिरती थी वहाँ सभीं यदुबंशी मैरेयक - बारूणी मदिरा पी कर आपस में लड़ते हुए समाप्त हो गए थे , बलराम जी ध्यान माध्यम से प्राण त्यागा था और प्रभु के लिए उनके धाम से रथ उतरा था जिस पर बैठ कर वे स्वधाम चले गए थे । प्रभु स्वधाम जाते समय अपनें सारथी दारुकके माध्यमसे द्वारका यह संदेशा भिजवाया कि वहाँ जो लोग हैं उनको तुरंत अर्जुनके साथ इन्द्रप्रष्ठ चले जाना चाहए क्योंकि आज से ठीक 7वें दिन द्वारका समुद्र में डूब जायेगी ।
* यह घटना कृष्ण जन्मके बाद ठीक 125 वें वर्ष की है । कृष्ण का स्वधाम जाना , पांडवों का स्वर्गारोहण , धृतराष्ट्र और गांधारी का गंगा तट पर सप्त श्रोत आश्रम पर महानिर्वाण प्राप्त करना , परीक्षितका पृथ्वी सम्राटके रूप में हस्तिनापुरमें आसीन होना और कृष्णके प्रपौत्र बज्रका मथुरा एवं शूरसेन क्षेत्रके सेनाधिपति रूपमें अभिषेक होना , यह सारी घटनाएँ एक साथ घटित हुयी ।
* भागवत कहता है , जब बज्र नाथ मथुरा आये तो मथुरा - वृन्दाबन वीरान हो चुका था, बहुत कम आबादी ही गयी थी और प्रभु श्री कृष्ण के सभीं लीला स्थलों की पहचान भी समाप्त हो चुकी थी ।
* लगभग 70 सालमें ऐसा क्या हुआ मथुरा एवं ब्रज में कि प्रभु के सभीं लीला स्थलों को बतानें वाले कोई न थे और ऐसा जुछ नहीं दीखता था जिसके आधार पर यह समझा जा सके कि इन- इन स्थानों पर प्रभु कभीं लीलाएं की थी ।कहाँ गए वे लोग और क्या हुआ उन स्थानों को ?
> इस बात पर आगे चर्चा की जायेगी <
~~~ ॐ ~~~

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