Friday, July 22, 2011

क्या होगा गंगा स्नान से

लोग कशी जाते है …..

लोग काशी में बाना चाहते हैं ….

लोग काशी में आखिरी श्वास भरना चाहते हैं …..

और कबीर जी साहिब कहते हैं-------

ज्यों कबीरा काशी मरे,रामहि कौन निहोर

और इतना कह के चले गए उस स्थान पर जहां मरने वाला गदहे की योनी में जन्म लेता है//

कबीर जी साहिब की सोच है की वह जहां हैं उनका राम उनके पास हैं और …...

नानकजी साहिब जब काबा में पहुंचे तब काबा के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर अपना पैर

करके सो रहे थे और जब क़ाज़ी साहिब बोले की आप यह क्या कर रहे हैं?तब नानकजी साहिब का जबाब था,वह तो सर्वत्र है मैं किधर पैर करूँ?दोनों भक्त समकालीन थे,दोनों राम भक्त थे,दोनों के सभीं द्वार बंद थे और उनको जो भी दिखता था वह राम ही होता था//

लोग अपना पाप धोनें के लिए काशी गंगा स्नान करना चाहते हैं . क्या काशी में गंगा स्नान करनें से सभीं पाप धुल जाते हैं ? क्या होता है गंगा स्नान करनें से ?

गंगा स्नान से वे निर्मल होते हैं जो समझते हैं की मल क्या है और जिसको निर्मल की

पहचान होती है / गर्मी के मौसम में यदि कोई कम्बल ओढ़ कर बैठे तो उसे बैठना संभव नहीं रह जाता और कुछ समय बाद वह कम्बल को उतार देता है , ऐसा क्यों होता है ? क्योंकि उसे मालूम है की वह पसीनें से तर क्यों हो रहा है , इसका कारण क्या है ? जिस तरह कम्बल धारी को कम्बल का पता होता है वैसे जब निर्मल अन्तः करण वाला मल से प्रभावित होता है तब उसे मल के भार का पता चल जाता है / वह जो गुणातीत मार्गपर है उसे जब गुण छूते हैं तब पता चल जाता है और गुणों का असर उसे बर्दास्त करना कठिन हो जाता है /

वह जो अहंकार में हैं और मनोरंजन के लिए गंगा स्नान करनें जा रहे हैं उनके लिए गंगा एक साधारण नदी हैऔर वे जो जग रहे हैं जो जगनें के लिए यत्नशील हैं उनके लिए गंगा परम धाम का का मार्ग हैं /

गंगा स्नान यदि होश में हो रहा हो तो देह के सभीं नौ द्वार बंद हो जाते हैं उर वह गुणाती योगी के रूप में भोग संसार में स्वयं को देखता है और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की सभीं सूचनाओं में उसे ब्रह्म दिखता है और इस प्रकार उसे सभी पानी के श्रोत गंगा के रूप में दिखनें लगते हैं और वह नानकजी साहिब या कबीरजी साहिब की तरह निर्गुणी भक्त के रूप में हम सब के मध्य रहता है लेकिन हमलोग उनसे दूर ही रहते हैंपर जब वे नहीं रहते तब --------

हम सब के अंदर का निर्गुणी हमें चैन से नहीं रहनें देता और हम भागनें लगते हैं,कहीं गुरु द्वारा बनवाते हैं तो कहीं मंदिर लेकिन इस से होता क्या है?

====ओम====


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