Thursday, January 6, 2011

हम भ्रमित क्यों हैं ?



हम भ्रमित हैं , इसके पीछे कोई ठोस कारण तो होना ही चाहिए ।
जब बच्चा गर्भ में आता है तब से उसके जन्म के दिन तक

उसकी माँ जिस ऊर्जा क्षेत्र में रहती है ,
वह क्षेत्र
होता है , भ्रम का -

कैसे ? देखिये यहाँ ....
ज्योंहीं
पता चलता है की अमुक बहू गर्भ से है ,
गाँव की अन्य महिलायें समय गुजारनें का अपना अड्डा
उस घर को बना लेती हैं और .....
पूरे गाँव में झाडू मार कर झूठ को इकट्ठा करके उस घर में लाती है

और उसमें नमक मिला कर
प्यार से सुनाती हैं और वह बहू बिचारी उनकी बातों को सुनती रहती है

और धीरे - धीरे यह सब झूठ
उसके मन में सत नज़र आनें लगता है और यही भ्रम उस बन रही

माँ से उसके गर्भ में पल रहे बच्चे तक
पहुच जाता है ।
नौ महीनों तक गर्भवती महिला जिस वातावरण में रहती है ,

वह वातावरण झूठ , संदेह और भ्रमका
होता है फिर इस मोहाल में गर्भ में स्थित बच्चा इनसे कैसे बचा रह सकता है ?

कभी इस बात पर सोचना ----
चाहे आदमी नोबल पुरष्कार प्राप्त ही क्यों न हो लेकीन ....
उसकी पत्नी उसे एक यन्त्र की भाँती चलाना चाहती है ,

और ....
जहां यह संभव नहीं , वहाँ शांति का होना भीसंभव नही ।
और अशांति के वातावन में नोबल पुरष्कार प्राप्त करनें वाला

तो पैदा हो सकता है पर ....
शांति अन्तः कर्ण वाला , वह नहीं हो सकता ॥


गर्भवती महिला के आस - पास के माध्यम को -----
भ्रम से दूर रखें .....
संदेह रहित बनाएं .....
झूठ रहित रखनें की कोशिश करें .......
और ......
वहाँ सभी ई पहुँच न हो ,
इसकी ब्यवस्था होनी चाहिए , लेकीन .....
इस बात पर ध्यान होना चाहिए की .....
गर्भवती महिला कभी अकेलापन को महसूस न करे ॥

==== ॐ ======

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