Tuesday, January 4, 2011

बिचारे - आते तो हैं , लेकीन .....




हिन्दू परम्परा मेंकोई पराया शब्द नहीं है .....
हिन्दू शिव मंदिर में जल चढ़ाता है और ....
पीर बाबा के यहाँ जा कर लोबान भी जला आता है ॥

हिंदुस्तान में आये दिन कोई न कोई तीज - त्यौहार आये ही रहते हैं , चाहे वे ....
हिन्दू के हों ----
मुस्लिम के हों ---
ईसाईयों के हों ----
जैनियों के हों -----
बुद्ध से सम्बंधित हों ----
सिख परम्परा के हों ----
या कोई अन्य परम्परा के हों ॥

तीज - त्यौहार बिचारे आते तो रहते हैं लेकीन
क्या इनका हमारे अन्दर बह रही ऊर्जा पर
कोई असर पड़ता भी है ?
बिचारे आते ही क्यों हैं ?
ये क्या सोचते होंगे हम सब के बारे में ?
पुनः इनको कौन और क्यों भेजता है ?

विज्ञान को भनक पड़ी है की .......
अंतरिक्ष से न जानें किस अज्ञान आयाम से कोई ऐसे कण
हम सब तक पहुँचते हैं और लगातार
करोड़ों की संख्या में पहुच रहे हैं ।
वे हम में प्रवेश करते हैं और कोई सूचना किसी को अन्दर देते हैं
और डाकिये कीतरह पुनः प्रस्थान कर जाते हैं ।
ये कण हमारे देह में कोई प्रमाण तक नहीं छोड़ते जिनके आधार पर यह
पता लगाया जा सके की इनका मकसद क्या होता है ?
क्या हैं ये न्यूट्रिनो ?
देह में किस से मिलते हैं , ये ?
क्या संदेशा देते हैं , ये ?
किस से संदेशा लाते हैं , ये ?
यह सब आप के लिए , विज्ञान के लिए राज ही है अभी तक तो ।

आये दिन तीज - त्यौहार भी तो कहीं न्यूट्रिनो के तरह ही तो नहीं आते - जाते ?
ये बिचारे आते हैं ,
हम इनको तो देखते नहीं ,
पर ये पुरे समय रहते हैं , हमारे संग और फिर ....
कब और कैसे चले जाते हैं , किसी को कोई पता नहीं ॥
अब जब कोई त्यौहार आये तो आप उस से मिलना .....
उसके साथ रहना ....
क्या पता आप को उनके ....
आनें के राज का कुछ पता चल सके ॥

==== ॐ =====

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