Saturday, January 8, 2011

ऐसा भी होता है -----



यहाँ आप को दो बातों की आप की स्मृति को मैं ताजा करना चाहूँगा ...........
[क] सुकरात के सम्बन्ध में ----
और .....
[ख] आनंद के सम्बन्ध में ----

[क] सुकरात ----
कहते हैं ---
सुकरात की पत्नी जितनी कठोरे सुकरात के लिए थी उतनी कठोरे दिल की महिला का होना
कोई साधारण बात नहीं ।
सुकरात जी अपनें शिष्यों को उपदेश देते रहते थे और उनकी पत्नी उनके ऊपर
गरम चाय दाल कर चली जाती थी ।
कई बार सुकरात के कुछ शिष्य बोल भी पड़ते थे - गुरु जी आप एक बात
चुप रहें , हम इनको बताते हैं की .....
एक इंसान को दुसरे के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए
लेकीन सुकरात मुस्कुराकर बात को टाल दिया करते थे ।
एक दिन सुकरात को बोलना ही पडा , क्यों की उनके शिष्य कुछ ज्यादा ही भाउक हो उठे थे ।
सुकरा कहते हैं -----
आज सुकरात वहाँ न होता जहां है यदि यह मेरी पत्नी ऎसी न होती ,
इसका ब्योहार जितना कड़वा होता है ,
मेरी यात्रा उतनी ही और आगे मुझे पहुंचा देती है - ऐसा समझो की .....
मेरी पत्नी की कठोरता ही मेरी सत -यात्रा की ऊर्जा है ॥

[ख] आनद बुद्ध के परम शिष्य थे और उनके ही परिवार के भी थे ।
बुद्ध के साथ आनंद हर पल रहते थे , चाहे बुद्ध सो रहे हों या यात्रा पर हों ।
आनंद जब बुद्ध के शिष्य
बनें थे तब बुद्ध से एक वचन लिया था की बुद्ध उनको अपने से दूर कभी नहीं करेंगे और ऐसा हुआ भी ।
ऐसा कहा जाता है की .......
निर्वाण प्राप्त बुद्ध जहां होते हैं .....
बुद्ध की ऊर्जा को जहां की धरती कुछ दिनों तक पी हो वहाँ जो पहुंचता है उसे निर्वाण में पहुँचना
कठिन नहीं होता लेकीन ....
आनंद को बुद्धत्व बुद्ध के होते न मिल सका ॥
सुकरात की पत्नी की कठोरता .....
सुकरात को अमर कर दिया ....
तुलसी दास की पत्नी की कठोरता ....
तुलसी दास को अमर कर दिया ....
बुद्ध के मृत शरीर को देख कर आनंद आनंद बन गए .....
आदि शंकाराचार्य को काशी के एक अछूत की बात उनको ब्रह्ममय बना दिया .....
और न जानें कितनें दृष्टांत ऐसे मिलेंगे
जो असत में .......
जी रहे लोगों को सत की राह पर लानें के लिए कठोर से कठोर परिस्थितियों से सम्बंधित होंगे ॥
आखिर कठोरता करती क्या है ?
कठोरता ....
में वह ऊर्जा होती है ....
जो ....
अहंकार को ...
भष्म करती है और उस से ....
जो
शीतलता मिलती है ....
उसका नाम ही निर्वाण है ॥

==== सुनना ही पड़ेगा ====

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