Sunday, January 9, 2011

कौन और कितना ----




सुनता होगा , इन आवाजों को -----

तन को आवाज को .....
मन की आवाज को ....
बुद्धि की आवाज को ....
भूख की आवाज को ....
दुःख की आवाज को ...
अपनों की आवाज को ....
परायों की आवाज को ....
पेड़ों की आवाज को .....
नभचरों की आवाज को ....
जल चरों की आवाज को ....
पशुओं की आवाज को ....
और ----
ग्रहों की आवाजों को ....
अपनी आवाज को :::::::::
वह ----
जो अपनी आवाज सुन लिया ॥
सबकी आवाज सुन लेगा
और ....
जो अपनी आवाज न सुन पाया वह ....
परम बहरा कहा जा सकता है ॥
छोटी - छोटी बातें हैं जिनको पकड़ कर यात्रा करनें का अपना मजा है ,
आप भी कभी - कभी ऎसी यात्रा किया करें ॥
मन की आँखे यदि अपनें को देखनें में सफल हैं तो .....
ऎसी आँखें एक न एक दिन .....
प्रभु को भी पहचान ही जायेंगी ॥

==== ॐ =====

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