Friday, April 20, 2012

जीवन दर्शन 44

  • वह क्या है जो स्वयं में भय है ?

  • क्या वह मौत तो नहीं?

  • वह जो प्रकृति के नियमों के प्रतिकूल चलता है वह मौत की ओर जाता है

  • वह जो प्रकृति के अनुकूल चल रहा है उसे मौत से भय नहीं होता

  • मौत एक ऐसा परम सत्य है जिसको कोई नहीं नक्कार सकता

  • परमात्मा है , ऐसा कहना विवाद रहित नहीं हो सकता

  • लेकिन मौत है , ऐसा कहना विवाद रहित जरुर है

  • वह जो मौत से दूर भागता है,मौत से उतना नजदीक होता जाता है

  • तन की मौत तो सबकी होती है

  • लेकिन मन की मौत होना असंभव है

  • गीता में प्रभु श्री कृष्ण कहते हैं , इंद्रियों में मन मैं हूँ "

  • मन एक माध्यम है जो एक तरफ अमरत्व से जुड़ा है और दूसरी तरफ मौत से

  • मन का जो गुलाम है वह मौत से दूर नहीं रह सकता

  • वह जिसके इशारे पर उसका मन चलता हो उसकी मित्रता मौत से होती है

  • भोगी मौत का बैरी है और योगी मित्र

  • प्रभु में डूबा हुआ योगी मौत को देख सकता है जैसे जुन्नैद

===== ओम्======




1 comment:

  1. बढ़िया प्रस्तुति ।
    बधाई ।।

    ReplyDelete