Sunday, April 1, 2012

जीवन दर्शन - 35

  • तीन गुणों से माया है और माया प्रकृति का निर्माता है

  • तीन गुणों के अपनें-अपनें भाव हैं

  • सात्त्विक गुण निर्विकार प्रभु से जोड़ता है

  • राजस गुण भोग में आसक्ति बनाता है

  • तामस गुण मोह – भय एवं आलस्य से जोड़ कर रखता है

  • मनुष्य में सात्विक गुण का केन्द्र ह्रदय है

  • राजस गुण का केंद्र है प्रजनन इंद्रिय के आस – पास का स्थान जिसे स्वाधिस्थान चक्र कहते हैं

  • तामस गुण के भावों का केंद्र है नाभि चक्र[मणिपुर चक्र]

  • श्री कृष्ण कहते हैं , “ तीन गुणों के भाव मुझसे हैं और मैं भावातीत हूँ "

  • शब्दों से संसार बसत है और मौन में भगवान बसता है

  • प्यार ह्रदय की उपज है और वासना मन – बुद्धि की

  • प्यार ह्रदय में बसे प्रभु की तरंगों से है जो आत्मा से निकलती हैं

  • वासना की तरंगें मन से उठती हैं और तन में समाप्त हो जाती हैं

  • वासना अज्ञान की ऊर्जा से है और प्यार सत् की उर्जा है

====ओम् =======




No comments:

Post a Comment