Friday, April 27, 2012

जीवन दर्पण 45

  • जब आप क्रोध में हों तब देखना उसके होनें के कारण को,कारण आप स्वयं नहीं कोई और होगा

  • भोग - तत्त्वों एवं क्रोध का आपसी गहरा सम्बन्ध है

  • राजस गुणों के तत्त्वों के साथ धनात्मक अहंकार होता है जो स्पष्ट दिखता है

  • तामस गुण का अहँकार सिकुड़ा हुआ समय के इन्तजार में केंद्र में झुप कर रहता है

  • भोग तत्त्वों में अहँकार की उम्र सबसे कम होती है

  • अहँकार की अनुपस्थिति में सत् का बोध होता है

  • सत् वह है जो संसार के बोध के साथ प्रभुमय बनाए

  • भोग तत्त्वों एवं अहँकार के सम्मोहन के प्रभाव से जो बच रहता है वह है ज्ञानी

  • ज्ञानी प्रभु के सम्बन्ध में चुप रहता है

  • लाओत्सू कहते हैं , सत् ब्यक्त करनें पर असत्य बन जाता है "

  • अपनें को दर्पण में क्या देखते हो स्वयं के मन को दर्पण बनाओ

===== ओम्======



1 comment:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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