Sunday, March 11, 2012

जीवन दर्शन 26

आज जो हो लेकिन कल जिसका अस्तित्व बदल जाए वह सत्य नहीं

वह जिसके ऊपर समय का प्रभाव न हो वह सत्य है

अपनी सोच के पीछे कामना - अहंकार , मोह – लोभ एवं भय – आलस्य की ऊर्जा न रखो , तुम सत्य में होगे

जबतक औरों के इशारे पर अपना कदम रखते रहोगे तुम सत्य में नहीं पहुँच सकते

लोगों की मानसिकता दिन प्रति दिन उनको सिकोड़ रही है

लोगों की उलझन को जबतक अपनें मनोरंजन का साधन समझते रहोगे तुम्हारा मार्ग गलत होगा

लोगों का कभी सुनो भी हमेशा सुनाते ही रहनें से तुम्हारा अहंकार सघन होता है

जीवन में सहारा जरूरी है लेकिन सहारे का गुलाम बन कर रह जाना दुःख का कारण हो सकता है

जो देखो उसमें उसे पकडो जिससे वह है और वह सत्य होगा

जब कोई आप का अपना बन रहा हो तो होश में रहना उसमें उसका गहरा स्वार्थ छिपा हो सकता है

दो रुपये का बैगन लेते समय आदमी दस बार सोचता है और जीवन का सौदा बिना सोचे कर बैठता है


===== ओम्======


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