Monday, September 20, 2010

आखिर वह चल पडा

वह करता भी क्या ? कोई विकल्प न था उसके सामनें ।
उसनें अपनें भविष्य के लिए कभी सोचा ही नहीं
की उसका भविष्य उसके सामनें वर्तमान के रूप में आ खडा हो गया था ।

जब उसे यह एह्शाश हुआ की वह जिस डाल को पकड़ कर चल रहा है वह ड़ाल नहीं ,
उसका अपना भ्रम है , उसका हाँथ तो सदैव खाली ही था ,
तब वह क्या करता , उसे जाना ही था ।

जब उसे पता चला की वह जिसको अपना आँगन समझ रखा है वह उसका नहीं
किसी और का है ,
तो वह क्या करता ?
इस आंगन में कभी - कभी किसी कोनें में बैठ कर दो - चार बूदें अपनें आशू के टपका कर
शांत हो लेता था लेकीन अब यह भी सहारा जाता रहा , फिर वह क्या करता ?

वह अपना सारा जीवन जिनके लिए गवाया था , वे जब उसको पराये से दिखनें लगे
तो वह क्या करता ?
उसे तो जाना ही था ।

इस संसार में कौन कब तक किसका बना रहता है ?
यह एक बहुत बड़ा राज नहीं है सीधी सी बात है -----
[क] जब तन से आप कमजोर हो जाते हैं तो बिल्ली भी आँखें दिखानें लगती है ।
[ख] जब आप का हाँथ खाली हो जाता है अर्थात आप निर्धन हो जाते हैं
तब .......
अपनें भी पराये से होनें लगते हैं ।

आखिर वह कहाँ गया होगा ?
इस बात पर आप भी सोंचे और मैं भी सोच रहा हूँ ।
आगे चल कर देखेंगे की
वह भक्त ........
कहाँ गया होगा ॥

===== जय हो ======

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