Wednesday, March 16, 2011

उनकी बात को -----




देख रहे हो .....
सुन भी रहे हो .....
लेकीन .....
आप का अहंकार ....
आप को .....
अंधा और बहरा बना कर रखा है ....
लेकीन क्या हम जो कर रहे हैं , वही एक विकल्प है ?

वैज्ञानिक समुदाय अभी इन बात पर बेहोश है की ......
आज तक जितनी तुशामी घटनाएँ पृथ्वी पर घटित हुयी हैं उनसे ......
दिन छोटा हो रहा है और रातें बढ़ रही हैं ॥

यदि दिन की अवधी इसी तरह घटती रही और रात की अवधी बढती रही तो
क्या ----
कभी ऐसा भी नहीं हो सकता की .....
दिन समाप्त हो जाए और रात ही रात रहे ?

अब आप भूगोल पर एक नज़र डालिए ------
दक्षिण से उत्तर की ओर आप अपनी नज़र बढाते रहें और गूगल - अर्थ पर जो देखे उसे समझते रहें
ऐसा करनें से एक बात तो स्पष्ट नज़र आती है की .....
तुसामी जैसी ऊर्जा समुद्र में दक्षिणी ध्रुव की ओर से आती है
क्योंकि ----
जापान , इंडोनेसिया , मलेसिया , भारतीय दक्षिणी - पूर्वी तट , भारतीय दक्षिणी पश्चिमी तट ,
दक्षिणी अफ्रिका आदि के नक़्शे बताते हैं की .....
इनको कोई काट रहा है और ये पतले होते जा रहे हैं ॥

त्रेता - युग का लंका भी कहीं इसी भू - गोलार्ध में था जो कब और कैसे समाप्त हो गया कुछ पता नहीं ॥
आज जावा , सुमात्रा और बाली में मुस्लिम मान्यता के लोग अधिक हैं लेकीन वहाँ के मुस्लिम
रामलीला का मजा उठाते हैं , ऐसा क्यों है ? यह कोई साधारण बात नहीं , सोचनें की बात है ॥
आज वहाँ के लोग मुस्लिम होते हुए भी हिन्दू देवी - देवताओं के नाम पर अपनें बच्चों का नाम रखते है ,
ऐसा क्यों हैं ? इन सब में जरुर कोई गहरी बात छिपी हुयी है ॥

आखिर प्रकृति क्यों -----
पूरब को पानी से तबाह करती है ----
और ----
पश्चिम को बर्फ से ?

==== ॐ ======

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