Wednesday, February 22, 2012

भय - भगवान

  • मृत्य एवं भय में क्या रिश्ता है ?

  • भय तामस गुण का एक तत्त्व है

  • तामस गुण का केंद्र मनुष्य के देह में नाभि है

  • भय – वैराज्ञ एक साथ एक बुद्धि में नहीं बसते

  • बिना वैराज्ञ संसार को समझना संभव नहीं

  • बिना संसार बोध हुए प्रभु से मिलना संभव नहीं

  • बिना वैराज्ञ भगवान मात्र एक संदेह है

  • ससार बोध में स्व – बोध भी सामिल है

  • संसार मनुष्य की परिधि है जहां भोग की चादर फैली हुयी है

  • मनुष्य का केन्द्र है आत्मा जिसके माध्यम से प्रभु दिखता है

  • आत्मा - परमात्मा का बोध निर्विकार मन से होता है

  • निर्विकार मन ही वैराज्ञ है

  • ससार माया की चादर है

  • आया प्रभु निर्मित है

  • माया केंद्रित ब्यक्ति मायापति को नहीं समझता


===== ओम्=====



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