Saturday, February 25, 2012

उसमें सबकी पहचान है

  • दिन एवं रात को अलग – अलग देखना एक सहज भ्रम है

  • दिन का प्रारम्भ रात्रि से और रात्रि का प्रारम्भ दिन से है

  • ब्यय में अब्यय की झलक पाना ही साधना है

  • वह इंद्रिय रहित है वह मन रहित है लेकिन दोनों का श्रोत वही है

  • क्या वह पांच बिषयों में सीमीत है

  • क्या उसे हमारी पांच ज्ञानेन्द्रियाँ पहचानती है

  • वह कौन सी बस्तु या जगह है जहां वह नहीं

  • हम उसकी निगाह से परे जा कैसे सकते हैं

  • साकार की यात्रा निराकार में पहुंचाती है

  • भोग का अंत वैराज्ञ है


=====ओम्======


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