Friday, February 24, 2012

भाषा एवं भाव

  • भाषा बुद्धि की बात को प्रकट करती है और भाव दिल की बात का रस होता है

  • संसार में बनें रहनें के लिए भाषा एक माध्यम है और भाव स्वयं से जोड़ता है

  • संसार में सभीं जीवों की अपनीं-अपनी भाषा होती है जैसे अमेरिका का कुत्ता जगन्नाथ पूरी के कुत्ते की भाषा को समझता है लेकिन मनुष्यों में ऐसा नहीं है/

  • महल में रहने वाला कुत्ता झोपड़े में रहनें वाले कुत्ते से घृणा नहीं करता लेकिन मनुष्य?

  • सभीं देशों के एक वर्ग के सभीं जीव – जंतुओं का रहन – सहन,खान – पान,स्वभाव एवं भाषा एक सी होती है लेकिन मनुष्य की?

  • भाषा का जन्म भावों के ब्यक्त करनें की ऊर्जा से हुआ है

  • जो भाषा भावों के जितनी करीब होती है वह उतनी ही जीवंत होती है

  • कबीर , मीरा , नानक के पास सीमित शब्द ते लेकिन जो बात वे उन शब्दों में ढाला वह सीमा रहित हैं

  • भक्त भाषा का गरीब होता है लेकिन भाव का सागर उनके दिल में बसता है

  • मनुष्य में तीन तरह के भाव बहते हैं;सात्त्विक,राजस एवं तामस और इन तीन के परे जो भाव है उसे भावातीत कहते है जिसकी ऊर्जा में प्रभु बसता है

==== ओम्=====




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