Monday, November 15, 2010

क्या करें ------



इन्द्रियों को वर्त्तमान में रस मिलता है
और
मन को गुजरे वक़्त की घटनाओं में ॥

आँखें खोजती हैं -- रूप - रंग को
और
कान खोजता है मधुर ध्वनि को ॥

जिह्वा खोजती है स्वाद को
और
नाक खोजती है सुगंध को ॥

त्वचा खोजता है संवेदना की लहर को
और
बुद्धि खोजती है , तर्क - वितर्क के बिषय को ॥

और ------
जहां -----
इन्द्रियाँ ......
मन .......
बुद्धि .....
एक साथ बसते हैं ,
वह है -----
परमात्मा का आयाम ॥

अब आप सोचो ......
जब सभी अंग लग - अलग यात्रा पर हैं
तो फिर अपना क्या होगा ?

====== कुछ तो करना ही है =======

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