Friday, November 19, 2010

मुझे नहीं पूछना था -------



मैं बस इतना पूछा था .....
शायद आप भी भारतीय ही हैं ।
एक लगभग सत्तर - पचहत्तर साल के रहे होंगे , जिनसे मैं यह बात पूछी थी । हमारे प्रश्न के बाद तो
उनका रंग ही फीका पड़ गया , वे मुझे देखे और इशारा किया साथ में बैठनें का , मैं बैठ तो गया लेकीन
अन्दर - अन्दर से पेशान हो उठा था , लग रहा था , मुझे पूछना नहीं चाहिए था । मैं धीरे से पूछा -
माफ़ करना , मझे पूछना नहीं चाहिए था , मुझे ऐसा नहीं लगा की यह बात आप के जख्मों को
खुरेदेगी , खैर आप मुझे माफ़ करें ।
वे भरे श्वर में बोल पड़े - ऎसी कोई बात नहीं है , आप मुझे देख कर भारतीय समझ बैठे थे , लेकीन मैं तो
फीजी का रहनें वाला हूँ ।
बचपन में मेरी माई मुझे भारत - अपनें देश की कहानियाँ सुनाया करती थी की मेरा देश ऐसा है , मेरे देश
की मिटटी की अपनी खुशबू है आदि - आदि । अभी तक तो मुझे मौक़ा न मिल पाया था , भारत जानें
का लेकीन घर की जिम्मेदारियां जब समाप्त हो गयी तो पिछले साल सोचा , चलते हैं अपना देश देखनें ।
भारत में मुझे दो चीजें सर्वत्र देखनें को मिली ------
[क] पश्चिम की सभ्यता का भारतीय - सभ्यता पर चढ़ता रंग और ----
[ख] गरीबों के तन की झांकती सुखी हड्डियां ।
मैं हैरान हो उठा , यह सोच कर की मेरी मैया , मुझसे इतना बड़ा झूठ क्यों बोला था ?
कहाँ है ------
भारतीयता .......
भारत की अपनी सभ्यता ....
भारतीय लोगों का आपसी प्यार .....
भारतीय पहनावे .......
भारतीय खान - पान ......
मैं जगह - जगह मिटटी को सूंघा लेकीन कहीं भी कोई मिटटी की सुगंध न मिली ।
कहाँ है -------
भारतीय संगीत .....
भारतीय - वाद्य
भारतीय नृत्य ......
और अपने भारतीय लोग ॥
भाई ! मुझे तो कुछ भी नज़र न आया , इतना कह कर वे सज्जन रो पड़े ॥
मैं हैरान हो उठा , पहले इतना प्रेमी ब्यक्ति कभी न देखा था जो भारतीय न होते हुए भी
भारत से इतना प्यार करता हो , आखिर करता क्यों न , उसके रगों में भी तो भारतीय
खून ही बह रहा था ॥
यह बात है अफ्रिका के एक एयर पोर्ट की ॥

==== ऐसे भी लोग - प्यारे लोग होते हैं =======

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