Thursday, November 4, 2010

जीवन की रस्सी को तो --------



जीवन को जिन - जिन रस्सियों से हमनें बाध रखा है ,
उनको को धीरे - धीरे खोलना ही पड़ेगा ,
चाहे यह काम अभी से प्रारम्भ कर दें या कोई मुहूर्त निकलवा कर करे ,
इसके बिना मनुष्य हो कर भी
हमें पशुवत जीवन में रहना ही होगा ।
वह कौन सी रस्सियाँ हैं जिमें हम अपनें जीवन को फसा रखे हैं ?
बारीकी से यदि देखा जाए तो .....
हमारा जीवन दो पर आधारित है -----
[क] सुरक्षा और .....
[ख] प्यार ......
सुरक्षा के लिए हम महल बनवाते हैं और प्यार के लिए पत्नी की तलाश करते हैं ।
सुरक्षा के लिए जब महल बन जता है तब हम खूब खुशियाँ मनाते हैं
और गृह प्रवेश के नाम पर
एक अच्छा मनोरंजन का प्रयोजन भी करते हैं ,
लेकीन क्या हम सुरक्षित मह्शूश कर पाते हैं ?
जिस प्यार के लिए हम घर बसाते हैं , बच्चे पैदा होते हैं
लेकीन क्या वह प्यार हमें मिल पाता है ?
मनुष्य को जिस दिन इन दो प्रश्नों का माकूल जबाब मिल जाता है
उस दिन सभी बंधन अपनें आप
गिर जाते हैं और -----
वह मनुष्य ससार में रहता हुआ , स्वयं को ......
प्रभु में देखता है ॥
वह कौन सी रस्सियाँ हैं जिमें हमारा जीवन नारज की ओर जाता दिखता है ?
इस प्रश्न को आप स्वयं देखें और सोचें की ऐसे बंधन कौन से हैं ?

==== सब शान्ति में रहें =====

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