Monday, November 1, 2010

तलाशिये ऐसे लोगों को -------


## जो मध्य उम्र के हों और उनके अन्दर परमात्मा की सोच किसी न किसी रूप में न हो .........
## जो परमात्मा के नाम पर सिकुड़ न जाते हों .......
## जो परमात्मा से डरते न हों ......
## जो परमात्मा को अपनें साथ - साथ साकार रूप में रखना चाहते हों .....
## जो परमात्मा को अपनी ढाल न बना कर रखना चाहते हों .....
## जो परमात्मा से वह सब न चाहते हों जो उनके लिए असंभव लग रहा हो ......
लोग परमात्मा को क्यों चाहते हैं ?
** क्यों की परमात्मा कुछ कहता नहीं ------
** क्योंकि परमात्मा तर्क - वितर्क नहीं करता ------
** क्योंकि परमात्मा कुछ फूल , कुछ अक्षत [ चावल ] , सड़ा-गला फल से खुश हो कर वह देता है ,
जो .....
[क] लगभग असंभव होता है .....
[ख] जो किस्मत बदल देता है ....
[ग] जो पुत्र - धन देता है .....
[घ] जो अति सुन्दर नारी देता है ....
[च] जो सुख , सम्पति देता है .....
भला ऐसे को कोई क्यों नहीं चाहेगा
जो -----
तन , मन , सुबुद्धि , धन - दौलत , पुत्र , नारी और मरनें के बाद स्वर्ग , जहां के भोग के लिए देवता
भी तरसते हैं .......
जिसकी मांग शून्य हो ......
अब आप सोचिये =======
जब मन - बुद्धि में इतना कूड़ा - करकट भरा है
तो क्या ....
हम परमात्मा को हासिल कर सकते हैं ?
भाई ! कहाँ चले , परमात्मा को तलाशनें -ज़रा -------
अपनें अन्दर झाँक कर देखना , कहीं वह .......

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