Monday, December 20, 2010

यह प्रकृति का नज़ारा है



प्रकृति से प्रकृति में हम सब हैं जैसे एक माँ - पिता की औलादें होती हैं
लेकीन हमें कहाँ फुर्सत है की
एक दुसरे को अच्छी नज़र से देखें ।

यदि प्राकृतिक ढंग से बच्चा जन्म ले तो वह दिन की जगह रात्री में पैदा होता है
लेकीन आज ज्यादातर
शिशु चिकित्सालाओं मेंजन्म ले रहे हैं और डाक्टर लोगों के पास इतना
वक्त नहीं की शिशु को प्राकृतिक ढंग
से जन्म लेनें दें , बिना दर्द , बिना देरी किये मिनटों में डेलिवरी करा दी जाती है
इसका परिणाम क्या हो रहा है ?
इस बात पर भी हम कुछ सोचेंगे लेकीन बाद में ।
प्रीडेलिवरी केसेज में जो बच्चे जन्म लेते है उनमें लगभग नब्बे फीसदी बच्चे
लड़के होते हैं और दस फीसदी
लडकियां होती हैं ।
जो बच्चे पहले पैदा होते हैं उनमें लड़कों के मरनें की संख्या लड़कियों से अधिक होती है ।

रात्री में जब बच्चा पैदा होता है तब क्या होता है ?
रात्री में जन्म लेनें वाले बचों को अँधेरे का अनुभव गर्भ के बाहर भी मिलनें
से उनके दिमाक पर कोई प्रतिकूल
असर नहीं पड़ता , क्योंकि गर्भ में उन्हें इस अन्धकार का अच्छा अनुभव हो गया होता है ।
दिन में जो बच्चे पैदा होते हैं उनमें -----
बड़े होनें पर निम्न बातें देखी जा सकती हैं .....
[क] चिडचिडापंन
[ख] भय
[ग] घबडाहट
और यदि सही - सही आकडा इकट्ठा किया जाए तो -----
ऐसे लोग जिनको अकस्मात् दिल का दौड़ा पड़ता है उनमें से अधिकाँश लोगों का
जन्म दिन में हुआ होता है ।
क्या आप जानते हैं की जो बच्चे शुक्ल - पक्ष में पैदा होते हैं
उनमें दिल के दौड़े की
सिकायत बड़े होनें पर
न के बराबर मिलती है ,
यदि आप डाक्टर हैं तो आप इस बिषय पर आकडे
इक्कठे करे और शोध करे
मैं गारंटी देता हूँ की आप को नोबल पुरष्कार जरुर मिलेगा ।

यदि आप निउरो सर्जन हैं तो आप के लिए यह बिषय ज्यादा रुचिकर लगेगा -----
ब्रेन की बीमारियों से जो लोग पीड़ित हैं उनमें से अधिकाँश लोगों का
जन्म दिनमें हुआ मिलेगा और ....
रात्री में जो जन्म लेते हैं उनमें दिमाकी बीमारियों का प्रकोप न के बराबर होता है ॥
बच्चा जिस दिन गर्भ में आता है , एक कण के रूप में,
उस घड़ी से लेकर प्रशव के ठीक बाद तक का
उसका अनुभव , उसके आगे के जीवन को नियंत्रित करता है ॥

आज इतना ही -----
प्रकृति के प्रति होश ....
सीधे .....
प्रभु में सरका देता है .....
==== ॐ =====

No comments:

Post a Comment