Saturday, December 25, 2010

सूना आपनें ?



पृथ्वी पर बैठे -----
प्रयोगशालाओं में कैद ----
दूरबीन पर आँखे गडाए ----
नासा के वैज्ञानिकों को ....
अब ......
अन्तरिक्ष में भी हीरे - जवाहरातों के ....
तारे वह भी
दिन में नज़र आनें लगे हैं ॥

पृथ्वी के हीरों अब उतनी चमक नहीं ....
या यों कहे
की पृथ्वी से अब हम सब उबनें लगे हैं
और
खोज रहे हैं कोई और जगह जहा अपना ठिकाना
बनाया जाए ।
अब हमें कुछ ऐसा दिखनें लगा है की ----
इंसान खानाबदोशी जिन्दगी से आगे निकल गया है ----
अब इंसान काफी विकास कर चुका है लेकीन ----
कहते हैं न ....
भिखारी अरबपति बन जाता है लेकीन ----
उसकी गरीबी उसके साथ चिपकी रहती है ॥
इंसान सभ्यता के प्रारंभ में खानाबदोशी जीवन में रहता था ,
जहां जिननें दिन खाना मिलता था , वह वहाँ
उतने दिन रुकता था और फिर ...
नयी जगह की तलाश आगे निकल लेता था ,
आज जो वैज्ञानिक हीरे - जवाहरात के तारों को अंतरिक्ष में
देख रहे हैं वह तारे हीरों - जवाहरातों के नहीं हैं ,
वैज्ञानिकों के अन्दर की गहरी कामनाएं उनके सामनें
तारों के रूप में दिख रहीं हैं ॥
मेरे प्यारों !
खोजना ही है तो खोजो ----
खूब खोजो , थाकोगे भी नहीं ....
उसको ....
जो
हीरों ----
जवाहरातों में नूर बन कर बैठा है ॥

आज इतना ही

===== प्रभु आप को खुश रखे ====

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