Monday, December 27, 2010

कितना अच्छा लगता है -----



आप रेलवे प्लेटफार्म पर ----
या
एयर पोर्ट पर
कभी इंतजार किया है ---
और उस इंतजार में यदि कोई कहे ---
की ----
भाई साहब !
आइये लेते है एक - एक कोफ़ी
तो उस समय आप को कैसा लगता है ?
चलिए मैं बताये देता हूँ
यदि कोई अपना पहले का जाना - पहचाना है ......
तबतो अन्दर तेज लहर नहीं उठती , पर यदि सज्जन अनजानें हैं फिर ......
क्या पूछना , प्यार का तूफ़ान अन्दर उठनें लगाता है ,
कारण क्या होता है ? ...
अनजानें से इतना प्यार
और .....
जिसको जानते हैं , उस से बच कर निकलना चाहते हैं ॥
हम चाहते हैं ----
सब को जानना और खासतौर पर ----
सब की कमजोरियों को जानना ,
पर ----
हम यह नहीं चाहते की कोई हमारी कमजोरियों को जान सके ----
है न मजे की बात .....
सब का ब्यापार एक - झूठ का ब्यापार
और सब .....
एक दूसरे से किस प्रकार का भाव रख रहे हैं ,
ज़रा इस बात पर सोचिये ॥
नया ब्यक्ति जब मिलता है तब मन कहता है -----
नया पंछी है , सूना डालो ,
जितना अन्दर काफी दिनों से भर रहा है ,
इसके पहले की ----
वह भी औरों की तरह तुमको जान जाए ।
और जब वह कहता है की ----
भाई साहब कुछ सुनाइये -- फिर क्या ....
ऐसा लगताह ई जैसे -----
चट्टान पर डूब घास उग गयी हो .....
रेगिस्तान में जैसे बीस साल बाद बुँदे पड़ी हो
और ---
तब कोफ़ी का पेमेंट हम स्वयं कर देते हैं और धीरे से कहते हैं ......
चलिए बैठ कर बातें करते हैं ॥

इन्सार इनसाल को धोखा दे रहा है ....
इंसान प्रकृति को धोखा दे रहा है .....
इंसान स्वयं को धोखा दे रहा है ....
आखिर इंसान जा किधर रहा है ?

प्यारों !
पहले
दूसरों को पहचाननें के पहले
स्वयं को
पहचानना सीखो ॥

==== ॐ =====












No comments:

Post a Comment