Tuesday, October 5, 2010

सत बचन को


एक छोटी सी कहानी जो सत की ओर हमारे दिल को खींचती है ---------------
एक पथिक , थका - मादा एक पेंड के नीचे सुस्ता रहा था , उसे नीद लग गयी ,
वह सो गया और नीद में स्वप्न देख रहा है .........
की वह स्वर्ग में पहुच गया है जहां बहुत बड़ा जलसा मनाया जा रहा है ।
पथिक भय के मारे किसी झाड़ी में छिप कर जलसे का नजारा देख रहा है और मन ही मन सोच रहा है
की वापिस चल कर लोगों को बताउगा की स्वर्ग में
मैनें जलसा देखा है ।

स्वर्ग - जलसे में झांकियां निकल रही हैं , जिनमे पहली झांकी योगाचार्य बाबा राम देवजी महाराज की है
जिस में करोड़ों लोग कपाल भारती का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ रहे हैं ।
इसके बाद एक के बाद एक झांकिया निकल रही हैं । जब सारी झांकियां निकल गयी तब वह पथिक सोचा , क्यों न
झाड से बाहर निकल कर देखलें की इधर और क्या - क्या है ?
ज्यों ही वह बाहर निकला एक लगभग सौ साल का
बूढा एक दुबले - पतले घोड़े पर सवार हो कर धीरे - धीरे वहाँ से गुजर रहा था ,
उस पथिकनें सोचा , क्यों न इस से इस जलसे के बारे में जान लें ।
वह पथिक पूछा , बाबा ! इधर आप क्या कर रहें हैं इस भीड़ में , जा कर आराम करो,
क्या पता इतनी भीड़ के चपेटे में कहीं फस गए तो क्या होगा ?
और कृपया यह भी बताएं की आज यहाँ क्या हो रहा है ?
वह बूढा संन्यासी बोला , बेटा ! आज लोग यहाँ परात्मा का जन्म दिन मना रहे हैं ।
वह पथिक पुनः पूछा , बाबा !
परमात्मा कहाँ हैं ? बाबा मुस्कुराकर बोले , परमात्मा तो मैं ही हूँ ।

जैसे परमात्मा के जन्म दिन के अवसर पर परमात्मा सबके पीछे रहते हैं वैसे असत के पीछे सत रहता है
और इस कारण से इस युग को कलि युग कहते हैं ॥
कलि युग में राम , कृष्ण , हनुमान , शंकर की तस्बीरें लोगों के घरों से गायब हो गयी
और उनकी जगह ले लिया
आज के बाबाओं की तस्बीरोंनें ॥

कौन सुनता है , सत वचन को .......
कौन देखना चाहता है , सत पुरुष को .....

====== ऐसा ही चल रहा है ======

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