Friday, October 29, 2010

वह दिन दूर नहीं .........

जब सब सुनेंगे और .....
देखगे भी

विज्ञान कहता है - अब से लगभग 200 million साल पहले पृथ्वी का वर्तमान स्वरुप बना जब की इसका
निर्माण लगभग 4.5 billion वर्ष पूर्व में हो चुका था , लेकीन यह आग का गोला रूप में थी ॥
तब से आज तक पृथ्वी की सभी सूचनाएं एवं पृथ्वी भी स्वयं धीरे - धीरे किसी न किसी प्रक्रिया
के तहत समुद्र में जा रहीं हैं । समुद्र एक तरह से वह स्थान है जहां पृथ्वी से ठोस , द्रव आदि पहुँचते
रहते हैं
अर्थात समुद्र पृथ्वी का रिसाइकल बिन जैसा है ।

पृथ्वी का एक चौथाई भाग पर संसार है जहां जड़ - चेतन हैं और तीन चौथाई भाग समुद्र के पास है ॥
समुद्र का अस्तित्व तब तक है जब तक इसका स्तर नीचा है , जो धीरे - धीरे उचा हो रहा है क्योंकि
प्रथ्वी की सभी सुचनाये एवं स्वयं पृथ्वी भी धीरे - धीरे समुद्र में जा रहे हैं , समुद्र का स्तर उंचा हो रहा
है और पृथ्वी का स्तर नीचा हो रहा है ।
यदि गणित से देखें तो वह दिन आने ही वाला है जब ......
लोग सुनेंगे ही नहीं अपितु ......
देखेंगे भी ॥
जिस समय न हिम गिरी होगा ......
न उत्तुंग शिखर होगी ......
और न वह देखनें वाला होगा ॥
काश वह दिन एकाएक आता तो हम भी देखते और मनुष्य यह देख लेता की .....
जैसी करनी .....
वैसी भरनी ॥

===== कैसा होगा वह नज़ारा ====

No comments:

Post a Comment